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सुप्रीम कोर्ट में CJI को कहे अपशब्द, अब खुद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दी सफाई, जानिए क्या बोला ?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत
चीफ जस्टिस सूर्यकांत

CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में अपशब्द घटना पर दी सफाई, कहा संवैधानिक गरिमा बनाए रखना जरूरी।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को अपशब्द कहने और अदालत की कार्यवाही में बाधा डालने की हाल की घटना पर अब CJI जस्टिस सूर्यकांत ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इस पुरे मामले को अधिक गंभीर न बनाते हुए कहा की ‘युवा कभी-कभी ऐसी हरकते कर देते है’. साथ ही उन्होंने कहा की ‘हम सभी का यह कर्तव्य है कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और छवि बनी रहे.’ उनकी रक्षा करना और उनका सम्मान बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है.

क्या था पूरा मामला?

10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में उस समय असामान्य स्थिति बन गई, जब इलाहाबाद के एक वकील और याचिकाकर्ता ‘प्रबल प्रताप’ ने सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अपशब्द कहे और अदालत में कागज उछाल दिए. इससे कुछ समय के लिए कोर्ट की कार्यवाही बाधित हुई. सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उन्हें कोर्ट रूम से बाहर कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इलाहाबाद के वकील प्रबल प्रताप ने वहां के चीफ जस्टिस को कहा “श्रीमान न्यायिक सेवक, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एएसपी के खिलाफ साइबर अपराध गिरोह चलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करें.” जिससे सुनकर वह के जस्टिस के.वी. विश्वनाथन ने पूछा की ‘आप मुझे आदेश दे रहे है.’ जिसके बाद युवक ने कागज़ो को हवा में उछालते हुए अपशब्द कहने लगा. जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों द्वारा उससे कोर्ट से बाहर किया गया.

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क्या थी सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

इस घटना के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत कोई कार्रवाई न करते हुए ये कहा की ये व्यक्ति मानसिक रूप से काफी परेशान और हताश प्रतीत हो रहा है. जिसको लेकर हमे इससे सहानभूति है. इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA)’ ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अदालत की गरिमा सर्वोपरि है और न्यायिक कार्यवाही में किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार, धमकी या बाधा स्वीकार्य नहीं है, एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा कि न्यायपालिका का सम्मान लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और ऐसी घटनाएं न्याय व्यवस्था पर सीधा प्रहार हैं।

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