- मानसून सत्र के पहले ही दिन CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) ने जंतर-मंतर से ‘चलो संसद’ मार्च का ऐलान किया।
- दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि संसद मार्च की अनुमति नहीं है और किसी भी हाल में प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
- नई दिल्ली जिले में BNS की धारा 163 लागू कर संसद परिसर और वीवीआईपी इलाके को हाई अलर्ट पर रखा गया।
- संसद, शास्त्री भवन, विजय चौक और संसद मार्ग पर तीन से चार स्तर की बैरिकेडिंग की गई। RAF, दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती रही।
- हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़े और कई जगह बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की।
- पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिससे कई स्थानों पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
- भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई जगह आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
- कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया ताकि वे संसद की सुरक्षा घेरा न तोड़ सकें।
- संसद के मुख्य प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा और बढ़ा दी गई, जबकि पूरे इलाके को सुरक्षा एजेंसियों ने अपने नियंत्रण में ले लिया।
- जनपथ, संसद मार्ग, पटेल चौक और सेंट्रल दिल्ली के कई हिस्सों में ट्रैफिक जाम लगा। आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
- राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और आसपास के कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास अस्थायी रूप से बंद किए गए।
- सोनम वांगचुक आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने रहे और संसद मार्च को लेकर दिनभर राजनीतिक हलचल बनी रही।
- प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग परीक्षा अनियमितताओं, विशेषकर NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और कार्रवाई की रही।
- संसद के भीतर विपक्ष ने सरकार को घेरने की रणनीति बनाई, जबकि बाहर प्रदर्शन जारी रहा।
- कई विपक्षी नेताओं ने आंदोलन के प्रति समर्थन जताया, जिससे इसे राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा तेज हुई।
- सरकार का रुख स्पष्ट रहा कि विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन संसद की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
- दिल्ली पुलिस ने कहा कि संसद की ओर बढ़ना कानून का उल्लंघन है और बल प्रयोग केवल भीड़ को रोकने के लिए किया गया।
- दिनभर सोशल मीडिया पर आंदोलन, लाठीचार्ज और आंसू गैस की तस्वीरें और वीडियो वायरल होते रहे।
- संसद के बाहर सुरक्षा और प्रदर्शन, जबकि संसद के भीतर राजनीतिक टकराव—मानसून सत्र के पहले दिन की यही सबसे बड़ी तस्वीर रही।
- सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा—क्या प्रतिबंध के बावजूद संसद की ओर बढ़ना लोकतांत्रिक विरोध का हिस्सा है या देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था पर दबाव बनाने की राजनीति? यही बहस अब सड़क से लेकर संसद तक छिड़ चुकी है।
CJP के ‘चलो संसद’ मार्च की 20 बड़ी बातें
CJP के संसद मार्च के दौरान दिल्ली में सुरक्षा इंतजाम, प्रदर्शनकारियों-पुलिस के बीच टकराव और राजनीतिक हलचल की 20 बड़ी बातें।