नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना को लेकर सोमवार (7 सितंबर) को दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने दिल्ली सरकार और MCD को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं और प्रशासन को भविष्य में इन्हें रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
अदालत ने सवाल किया कि जब सरकार गेस्ट हाउस को रेगुलेट कर सकती है तो PG को नियंत्रित करने के लिए नियम क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं? हाईकोर्ट ने PG और हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए MCD को दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
‘हर दूसरे साल ऐसा हो रहा, हम इसे भुगत रहे’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से सवाल किया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने कहा, “आप क्या कर रहे हैं? त्रासदी हो चुकी है, अब भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?”
कोर्ट ने आगे कहा कि अगर PG के संचालन और सुरक्षा को लेकर पर्याप्त नियम नहीं हैं तो सरकार को नियम बनाने चाहिए। अदालत ने PG और गेस्ट हाउस के आकार, बिजली व्यवस्था और सुरक्षा मानकों को रेगुलेट करने की जरूरत पर भी जोर दिया। हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “हर दूसरे साल ऐसा हो रहा है और हम इसे भुगत रहे हैं।”
‘हादसे के लिए सिर्फ बिल्डिंग मालिक जिम्मेदार नहीं’
दिल्ली हाईकोर्ट ने सत्य निकेतन हादसे को केवल एक इमारत गिरने की घटना नहीं माना, बल्कि छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी से जुड़ी बड़ी समस्या बताया। अदालत ने कहा, “हादसे के लिए सिर्फ इमारत का मालिक ही नहीं बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय और MCD भी बराबर जिम्मेदार हैं।” कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से यह भी पूछा कि दूसरे राज्यों और शहरों से दिल्ली आने वाले छात्रों के लिए DU और सरकार की ओर से कितने हॉस्टल उपलब्ध कराए गए हैं।
अदालत ने कहा कि DU के पास बाहर से आने वाले छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं नहीं होने के कारण कई छात्र PG में रहने को मजबूर होते हैं। ऐसे में सरकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या पर ज्यादा गंभीर और प्रभावी तरीके से काम करने की जरूरत है।
MCD को एक हफ्ते में सेफ्टी ऑडिट का आदेश
हाईकोर्ट ने MCD को एक सप्ताह के भीतर दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का सेफ्टी ऑडिट करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने MCD से यह रिपोर्ट देने को कहा है कि:
- सत्य निकेतन में हादसे वाली इमारत को सभी जरूरी मंजूरियां मिली थीं या नहीं।
- दिल्ली में संचालित PG और हॉस्टल की इमारतें कानूनी तरीके से बनी हैं या नहीं।
- इन इमारतों में कितने छात्र रह रहे हैं।
- इमारतों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम मौजूद हैं या नहीं।
इसके अलावा कोर्ट ने संबंधित सभी विभागों को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
‘PG मालिक धड़ल्ले से कर रहे अवैध निर्माण’
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली में PG संचालकों की ओर से किए जा रहे कथित अवैध निर्माण पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि अगर अधिकारियों को अपनी कानूनी जिम्मेदारियों की जानकारी होती और वे उनका सही तरीके से पालन करते तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई जगहों पर PG मालिक अवैध तरीके से इमारतों का विस्तार कर रहे हैं। जिस इमारत को दो मंजिल बनाने की अनुमति होती है, उसे कई जगह छह मंजिल तक बना दिया जाता है, जबकि उसकी नींव वही रहती है।
छात्रों की सुरक्षा पर कोर्ट ने जताई चिंता
हाईकोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्रों की जान जोखिम में है और सत्य निकेतन हादसे के बाद भी कुछ छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका थी। अदालत ने कहा, “काफी छात्रों की जान दांव पर लगी है। कुछ छात्र अभी भी मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। इससे ज्यादा दुखद कुछ नहीं हो सकता।” कोर्ट ने बचाव अभियान को पूरी ताकत के साथ चलाने की उम्मीद जताई। वहीं, MCD और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को भरोसा दिलाया गया कि राहत और बचाव अभियान में हर संभव कदम उठाया जा रहा है। सत्य निकेतन हादसे के बाद अब हाईकोर्ट के निर्देशों से दिल्ली में PG और हॉस्टल की सुरक्षा व्यवस्था, अवैध निर्माण और छात्रों के लिए हॉस्टल की उपलब्धता को लेकर व्यापक जांच और कार्रवाई की राह खुल गई है।