नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अमेरिका स्थित ईसाई मिशन द टिमोथी इनिशिएटिव (TTI) और उसके कई पदाधिकारियों के खिलाफ कथित FCRA उल्लंघन के मामले में FIR दर्ज की है। CBI का आरोप है कि विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए भारत के अलग-अलग हिस्सों में ATM से करोड़ों रुपये की रकम निकाली गई। जांच में नक्सल हिंसा प्रभावित इलाकों से जुड़े लेनदेन की भी बात सामने आई है।
ED के पत्र के बाद CBI ने दर्ज की FIR
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जुलाई 2026 में CBI को पत्र लिखकर मामले की जांच का अनुरोध किया था। इसके बाद CBI ने 27 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की।
FIR में TTI के संचालन प्रमुख जोनाथन एस. राजन, वित्तीय संचालन से जुड़े मीका मार्क, वित्त प्रमुख अजीत वर्गीस मथाई और तीन फील्ड अधिकारियों—बबलू कुर्मी, सुप्रीम जॉय और वर्गीस चाको के अलावा अज्ञात लोगों और संगठन को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपों में FCRA के तहत विदेशी फंड की प्राप्ति और इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों के उल्लंघन के साथ BNS और IT Act के तहत आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं।
विदेशी डेबिट कार्ड से 92.55 करोड़ रुपये निकालने का आरोप
CBI की FIR के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर अमेरिका के Truist Bank द्वारा जारी विदेशी डेबिट कार्ड का इस्तेमाल कर देशभर के अलग-अलग ATM से रकम निकाली।
जांच एजेंसी के अनुसार, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच करीब 92.55 करोड़ रुपये (99,95,240 अमेरिकी डॉलर) निकाले गए। इसके अलावा, जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और असम समेत कई राज्यों में विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए करीब 44 करोड़ रुपये निकाले जाने का भी आरोप है।
24 डेबिट कार्ड के साथ पकड़ा गया था मीका मार्क
CBI के मुताबिक, TTI के वित्तीय संचालन से जुड़े मीका मार्क को 24 अप्रैल को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 24 डेबिट कार्ड के साथ पकड़ा गया था। FIR में दावा किया गया है कि मार्क कई विदेश यात्राओं के बाद इन कार्डों के साथ भारत लौटता था।CBI का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में ऐसे 1,000 से अधिक विदेशी डेबिट कार्ड वितरित किए गए।
TTI भारत में FCRA के तहत पंजीकृत नहीं
CBI के मुताबिक, TTI भारत में FCRA के तहत पंजीकृत नहीं है। एजेंसी का आरोप है कि विदेशी धन को भारत में इस्तेमाल करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। अप्रैल में ED ने FEMA के तहत TTI और उसके पदाधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। ED ने आरोप लगाया था कि विदेशी फंड का इस्तेमाल नक्सली प्रभाव बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।
डेटा डिलीट करने का भी आरोप
अधिकारियों के मुताबिक, ED की कार्रवाई के बाद भारत में TTI का ग्लोबल पोर्टल भी उपलब्ध नहीं रहा। जांच एजेंसियों का आरोप है कि क्लाउड पर मौजूद डेटा और जब्त किए गए लैपटॉप में मौजूद जानकारी को अमेरिका स्थित सर्वर से रिमोट एक्सेस के जरिए डिलीट किया गया।
मामले से जुड़े TTI पदाधिकारियों की याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी सुनवाई की थी। अदालत ने कथित उग्रवादी गतिविधियों की फंडिंग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए टिप्पणी की थी।
प्रशिक्षण और गतिविधियों में रकम इस्तेमाल करने का आरोप
CBI की FIR में आरोप लगाया गया है कि जोनाथन राजन और अजीत मथाई यह सुनिश्चित करते थे कि ATM से निकाली गई रकम का इस्तेमाल भारत में TTI की गतिविधियों के लिए किया जाए।
FIR के मुताबिक, इसमें प्रशिक्षण आयोजित करना और धार्मिक प्रचार जैसी गतिविधियां शामिल थीं। CBI ने आरोप लगाया है कि इन गतिविधियों का संबंध वामपंथी उग्रवाद को बढ़ावा देने से था। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी की FIR में दर्ज दावों पर आधारित हैं और मामले की जांच अभी जारी है।