वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बैन करने का ऐलान किया है। ट्रंप ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर इन मीडिया संस्थानों पर उनके प्रशासन और अमेरिका से जुड़ी खबरों में लगातार ‘फेक न्यूज’ और ‘झूठ’ रिपोर्ट करने का आरोप लगाया।
ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति, ट्रंप प्रशासन या अमेरिका की कवरेज करने वाले मीडिया संस्थानों को लगातार ‘काल्पनिक खबरें और झूठ’ प्रकाशित या प्रसारित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में दूसरे मीडिया संस्थानों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है।
Truth Social पर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह तत्काल प्रभाव से CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बैन कर रहे हैं। उन्होंने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग को ‘फेक न्यूज’ बताते हुए कहा कि मीडिया को राष्ट्रपति और सरकार के बारे में ‘झूठ’ रिपोर्ट नहीं करना चाहिए।
बाद में ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यह फैसला किसी एक खबर की वजह से नहीं लिया गया है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में प्रकाशित खबरों के “संचयी” प्रभाव का परिणाम है।
Politico के $8 मिलियन वाले दावे पर क्या कहा?
ट्रंप ने Politico को लेकर आरोप लगाया कि जो बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिकी सरकार ने इस मीडिया संस्थान को करीब 8 मिलियन डॉलर की सब्सक्रिप्शन राशि दी थी। ट्रंप ने इस भुगतान को अपने फैसले का एक कारण बताया।
हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रकम सरकार की अलग-अलग एजेंसियों द्वारा Politico की खबरों और Politico Pro जैसी पेड सेवाओं की खरीदी गई सब्सक्रिप्शन से जुड़ी थी। इसे Politico को सरकार की ओर से सीधे दी गई किसी एकमुश्त रकम के रूप में पेश करना सही नहीं है। Politico ने भी ट्रंप के इस दावे को खारिज किया है।
MS NOW को लेकर ट्रंप के दावे में क्या है तथ्य?
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में MS NOW के बारे में कहा कि उसने कम दर्शकों और विश्वसनीयता की कमी के कारण MSNBC से अपना नाम बदला है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार MS NOW ने 2025 में NBCUniversal से अलग होने के बाद अपना नाम बदला था। इसका कारण कॉमकास्ट के Versant स्पिनऑफ के बाद NBC ब्रांड से अलग होना था, न कि दर्शकों की कमी या विश्वसनीयता में गिरावट।
क्या सच में व्हाइट हाउस से बाहर हो गए मीडिया संस्थान?
ट्रंप के ऐलान के बाद शुक्रवार को CNN, MS NOW और Politico के पत्रकारों को तत्काल तौर पर व्हाइट हाउस परिसर से बाहर किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों संस्थानों के पत्रकार शुक्रवार को व्हाइट हाउस में काम करते दिखाई दिए। बाद में प्रशासन की ओर से शनिवार से व्हाइट हाउस परिसर में उनकी पहुंच रोकने की बात सामने आई।
बैन का दायरा प्रेस पास, व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश, प्रेस ब्रीफिंग या राष्ट्रपति के कार्यक्रमों तक सीमित होगा या इन सभी पर लागू होगा, इसे लेकर शुरुआती घोषणा में पूरी स्पष्टता नहीं थी।
CNN और Politico ने क्या कहा?
CNN ने कहा कि उसका व्हाइट हाउस कवरेज निष्पक्ष और सटीक है और अमेरिकी संविधान मीडिया को सरकार के हस्तक्षेप के बिना रिपोर्टिंग करने का अधिकार देता है। CNN ने संकेत दिया कि यदि बैन लागू किया जाता है तो वह इसे कानूनी चुनौती दे सकता है।
Politico ने भी कहा कि वह व्हाइट हाउस की रिपोर्टिंग जारी रखेगा और अपने First Amendment अधिकारों की रक्षा करेगा। व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन ने भी मीडिया संस्थानों को उनकी रिपोर्टिंग के आधार पर निशाना बनाए जाने का विरोध किया।
AP पर भी पहले कार्रवाई कर चुके हैं ट्रंप
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने किसी बड़े मीडिया संस्थान की व्हाइट हाउस पहुंच को प्रतिबंधित किया है। फरवरी 2025 में Associated Press (AP) के पत्रकारों को कुछ राष्ट्रपति कार्यक्रमों और स्थानों से बाहर रखा गया था। AP ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी।
अदालती मामले में प्रेस की स्वतंत्रता और सरकारी अधिकारियों द्वारा मीडिया की पहुंच तय करने के अधिकार को लेकर कानूनी बहस हुई। AP से जुड़ी यह कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
आगे क्या होगा?
CNN, MS NOW और Politico पर प्रस्तावित कार्रवाई को लेकर कानूनी चुनौती की संभावना जताई जा रही है। अमेरिकी संविधान का First Amendment प्रेस की स्वतंत्रता की सुरक्षा करता है और प्रेस संगठनों तथा कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाया है कि क्या किसी मीडिया संस्थान की रिपोर्टिंग से असहमति के आधार पर उसकी सरकारी पहुंच रोकी जा सकती है। अंतिम कानूनी स्थिति अदालतों के फैसलों पर निर्भर करेगी।