हिमाचल प्रदेश सरकार का बड़ा कदम, कर्ज का बोझ कम करने के लिए तैयार हुआ नया वित्तीय प्लान

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य पर बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए ब्याज भुगतान और बॉन्ड प्रबंधन को लेकर एक नया प्लान बनाया गया है।

शिमला: बढ़ते कर्ज और वित्तीय दबाव के बीच हिमाचल प्रदेश सरकार ने कर्ज प्रबंधन के लिए चार साल का रोडमैप तैयार किया है। 2026-27 से 2029-30 के लिए बनाई गई इस मध्यम अवधि की ऋण प्रबंधन रणनीति में सरकार ने राज्य के ऋण-GSDP अनुपात को 40.64 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल यह अनुपात 43 फीसदी से अधिक बताया गया है।

सितंबर 2026 तक हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। सरकार का कहना है कि अब उसका फोकस केवल नई उधारी लेने के बजाय कर्ज की लागत, पुनर्भुगतान जोखिम और ऋण पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने पर रहेगा।

लंबे समय के कर्ज पर रहेगा जोर

सरकार की नई रणनीति के तहत पांच साल तक की अवधि वाले नए बाजार ऋण से दूरी बनाने की योजना है। इसके बजाय 15 से 20 साल या उससे अधिक अवधि वाले बॉन्ड के जरिए संसाधन जुटाने पर जोर दिया जाएगा।

इसका मकसद कर्ज चुकाने का दबाव कम करना और बार-बार नए कर्ज लेकर पुराने कर्ज को चुकाने की जरूरत को कम करना है। सरकार ऋण की औसत परिपक्वता अवधि भी बढ़ाना चाहती है।

वित्त विभाग के अनुसार मार्च 2021 में राज्य के बाजार ऋण की औसत परिपक्वता अवधि 6.96 साल थी, जो मार्च 2025 तक बढ़कर 8.15 साल हो गई। अब इसे 2029-30 तक करीब 11 साल करने का लक्ष्य रखा गया है।

ब्याज का बोझ घटाने की तैयारी

हिमाचल सरकार कर्ज पर लगने वाले ब्याज की लागत कम करने पर भी काम कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के सार्वजनिक ऋण की औसत ब्याज लागत 2020-21 में 7.61 फीसदी थी, जो 2024-25 में घटकर 6.77 फीसदी रह गई। सरकार का लक्ष्य इसे और कम करना है। इसके लिए बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए अलग-अलग अवधि के बॉन्ड जारी करने की रणनीति अपनाई जाएगी।

50 साल के ब्याजमुक्त कर्ज पर फोकस

हिमाचल सरकार केंद्र की Special Assistance to States for Capital Investment योजना के तहत मिलने वाले 50 साल की अवधि वाले ब्याजमुक्त कर्ज का भी अधिकतम इस्तेमाल करना चाहती है। सरकार के मुताबिक इससे सड़क, बुनियादी ढांचे और दूसरी पूंजीगत परियोजनाओं के लिए महंगे बाजार कर्ज पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

अभी हिमाचल की वित्तीय स्थिति कैसी है?

केंद्र सरकार की अगस्त 2026 में संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, 2026 के बजट अनुमान में हिमाचल प्रदेश का ऋण-GSDP अनुपात 42.8 फीसदी था। वहीं PRS के 2026-27 बजट विश्लेषण में राज्य की बकाया देनदारियां 2026-27 के अंत तक GSDP की 40.5 फीसदी रहने का अनुमान है। दोनों आंकड़ों में अंतर इसलिए है क्योंकि इनके दायरे और गणना का आधार अलग हो सकता है।

हिमाचल सरकार के नए रोडमैप का उद्देश्य अगले चार वर्षों में कर्ज के बोझ को नियंत्रित करना, ब्याज खर्च घटाना और राज्य की वित्तीय स्थिति को अधिक टिकाऊ बनाना है।

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