पटना: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विवादित बयान दिया है। गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या माफ होती तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह संविधान में विश्वास रखने वाले व्यक्ति हैं।
SIR को लेकर चुनाव आयोग पर साधा निशाना
मुकेश सहनी ने SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान को कमजोर किया जा रहा है। सहनी ने चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी निशाने पर लिया।
सहनी ने कहा कि चुनाव किसी नेता के लिए नहीं बल्कि जनता के लिए होते हैं। उनके मुताबिक जनता के पास सरकार और नेताओं को बदलने का अधिकार होता है।
केंद्र सरकार पर भी लगाए आरोप
VIP प्रमुख ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। सहनी ने पश्चिम बंगाल और बिहार के चुनावों का जिक्र करते हुए भी कई दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया के जरिए जनादेश को प्रभावित किया गया। ये दावे मुकेश सहनी की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी पुष्टि के लिए अलग-अलग दावों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
2029 को लेकर सहनी ने क्या कहा?
मुकेश सहनी ने अपने बयान में 2029 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि अगर 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनती है तो ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें जेल भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग उनके मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया में शामिल हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। यह भविष्य को लेकर सहनी का राजनीतिक दावा है, न कि कोई वर्तमान सरकारी या कानूनी निर्णय।
उपेंद्र कुशवाहा ने बयान की आलोचना की
मुकेश सहनी के बयान पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सहनी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को गोली मारने की बात करना उचित नहीं है। कुशवाहा ने कहा कि इस तरह के बयान की जितनी आलोचना की जाए, कम है।
मतदाता सूची और SIR को लेकर क्या है विवाद?
मुकेश सहनी का बयान ऐसे समय आया है जब SIR को लेकर विपक्षी दल और चुनाव आयोग आमने-सामने हैं। हालिया रिपोर्टों में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के भीतर चर्चा, टिप्पणियां और तकनीकी सुझाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आधिकारिक फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इस पूरे विवाद के बीच मुकेश सहनी की टिप्पणी ने चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। उनका बयान अब राजनीतिक दलों के बीच प्रतिक्रिया का विषय बना हुआ है।