कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में लगी प्रदर्शनी को लेकर विवाद गहरा गया है. उनकी प्रदर्शनी ‘नो आइडिया इज फाइनल’ से 105 में से 74 तस्वीरों को हटाने या बदलने के लिए कहा गया. रेहान का आरोप है कि इनमें दिल्ली में हुए युवा आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी तस्वीरें शामिल थीं. मामले पर विवाद बढ़ने के बाद बीकानेर हाउस प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा कि कुछ तस्वीरें उसकी निर्धारित नीति के अनुरूप नहीं थीं.
क्या है पूरा विवाद?
रेहान वाड्रा के मुताबिक, बीकानेर हाउस प्रबंधन ने प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले तस्वीरों पर आपत्ति जताई, उन्होंने दावा किया कि 15 अक्टूबर को ही प्रदर्शनी का लेआउट प्रबंधन के साथ साझा कर दिया गया था, लेकिन 21 अक्टूबर को उनसे 74 तस्वीरें हटाने या बदलने के लिए कहा गया. रेहान का कहना है कि हटाने के लिए चिह्नित तस्वीरों में दिल्ली के हालिया युवा आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के दृश्य थे. उनके मुताबिक, प्रबंधन ने तस्वीरों के राजनीतिक स्वरूप और उन्हें प्रदर्शित करने के समय पर सवाल उठाए, उन्होंने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय ध्वज वाली तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया था. रेहान ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि तस्वीरें उनके कलात्मक काम और आसपास घट रही घटनाओं का दृश्य दस्तावेज थीं. उनका कहना है कि प्रदर्शनी की तैयारी में काफी समय लगा था और आखिरी समय पर इतनी बड़ी संख्या में तस्वीरें हटाने का निर्देश उचित नहीं था.
बीकानेर हाउस प्रबंधन ने क्या कहा?
विवाद के बीच बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसाइटी ने कहा कि प्रदर्शनी में लगाई गई कुछ तस्वीरें उसकी नीति के अनुरूप नहीं पाई गईं, इसलिए उन्हें हटाने का अनुरोध किया गया. प्रबंधन के अनुसार, बीकानेर हाउस कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाला सार्वजनिक सांस्कृतिक संस्थान है. यहां आयोजित प्रदर्शनियों और उनसे जुड़ी गतिविधियों को सोसाइटी की नीतियों के अनुरूप होना चाहिए. प्रबंधन ने यह भी कहा कि नीति के अनुरूप पाई गई बाकी तस्वीरें प्रदर्शनी में लगी हुई हैं. हालांकि, प्रबंधन के सार्वजनिक स्पष्टीकरण में उन विशिष्ट तस्वीरों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया जिन्हें हटाने के लिए कहा गया था. इसी वजह से विवाद का केंद्र यह सवाल बना हुआ है कि तस्वीरों को नीति के विरुद्ध मानने का आधार क्या था.
प्रियंका गांधी ने बेटे का किया समर्थन
रेहान वाड्रा की मां और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर उनका समर्थन किया। उन्होंने लिखा, “जब कोई ताकतवर व्यक्ति किसी दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो उसे एहसास नहीं होता कि वह उस ताकत को पहले ही खो चुका है, जिसे बचाने की कोशिश कर रहा है.” प्रियंका ने आगे लिखा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है और वह हमेशा उसके साथ खड़ी रहेंगी. उनके बयान को इस विवाद में कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है.
रॉबर्ट वाड्रा बोले- बेटे पर गर्व है
रेहान के पिता रॉबर्ट वाड्रा ने भी उनका समर्थन किया. उन्होंने कहा कि कला और रचनात्मक काम को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए और लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने की आजादी होनी चाहिए. रॉबर्ट वाड्रा ने तस्वीरें हटाए जाने के घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है. परिवार का कहना है कि रेहान की प्रदर्शनी उनके कलात्मक काम का हिस्सा है और इसे राजनीतिक विवाद के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए.
प्रदर्शनी में अब भी लगी हैं तस्वीरें
विवाद के बावजूद ‘नो आइडिया इज फाइनल’ प्रदर्शनी जारी है. रिपोर्टों के अनुसार, हटाई गई तस्वीरों के बाद प्रदर्शनी में लगभग 35 से 40 कलाकृतियां और तस्वीरें बची थीं. रेहान ने कहा है कि वह पूरी तस्वीरों की श्रृंखला को किसी दूसरे स्थान पर प्रदर्शित करने की योजना बना रहे हैं. इस विवाद ने सार्वजनिक सांस्कृतिक संस्थानों की नीतियों, कला की सीमाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है. एक ओर बीकानेर हाउस प्रबंधन अपने नियमों का हवाला दे रहा है, वहीं रेहान और उनके परिवार ने तस्वीरें हटाए जाने के तरीके पर सवाल उठाए हैं. अब विवाद का अहम पहलू यही है कि तस्वीरों को हटाने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया और प्रबंधन की नीति को लेकर आगे क्या स्पष्टीकरण सामने आता है.