लखनऊ के शिवा शर्मा की मौत का मामला अब तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है. पुलिस ने लंबी तलाश के बाद श्रद्धा दुबे को गिरफ्तार किया है. इस मामले में उसकी बहन रश्मि और ड्राइवर इमरान उर्फ दानिश समेत 10 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर घटना की परिस्थितियों और फरारी के दौरान उनकी गतिविधियों का पता लगाने में जुटी है.
मेड ने बताया, शिवा और श्रद्धा के बीच हुआ था विवाद
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा की घरेलू सहायिका से अलग-अलग टीमों ने कई घंटे तक पूछताछ की. सहायिका ने अपने बयान में बताया कि 9 अक्टूबर को उसने श्रद्धा और शिवा को आपस में झगड़ते देखा था. दोनों के बीच काफी देर तक बहस हुई थी. उसके मुताबिक, श्रद्धा बार-बार अपने संपर्कों का हवाला देकर शिवा को धमका रही थी. पुलिस उसके बयान के साथ अन्य साक्ष्यों को जोड़कर घटना की पूरी कड़ी समझने की कोशिश कर रही है.
सात लोगों के बयान दर्ज, श्रद्धा के दो बैंक खाते फ्रीज
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक सात लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. अपार्टमेंट में रहने वाले एक व्यक्ति से भी पूछताछ की गई, जो शिवा के गिरने के बाद मदद के लिए पहुंचा था और उसे अस्पताल लेकर गया था.
जांच के दौरान श्रद्धा के दो बैंक खाते फ्रीज किए गए हैं। इनमें से एक खाते को घटना से पहले साइबर धोखाधड़ी के मामले में फ्रीज किया गया था. उसमें करीब ढाई लाख रुपये जमा थे. दूसरे खाते को शिवा की मौत के बाद फ्रीज किया गया, जिसमें लगभग साढ़े छह लाख रुपये होने की जानकारी सामने आई है.
मदद करने वालों के नाम पूछ रही पुलिस
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने किसी हाई-प्रोफाइल व्यक्ति का नाम नहीं लिया. हालांकि, उन्होंने कथित तौर पर पांच से छह ऐसे लोगों के नाम बताए, जिन्होंने उनकी मदद की थी. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान उन्हें किसने सहायता पहुंचाई.
पुलिस ने श्रद्धा से यह भी पूछा कि पकड़े जाने के समय वह किससे बात कर रही थी. इस पर उसने कथित तौर पर बताया कि वह अपार्टमेंट के वाई-फाई के जरिए अपने वकील से केस के अपडेट को लेकर बातचीत कर रही थी.
दो मोबाइल फोन का पता नहीं, बरामद उपकरणों की होगी फॉरेंसिक जांच
पुलिस को आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन मिले हैं, जबकि पूछताछ में दो अन्य मोबाइल फोन का भी जिक्र सामने आया. श्रद्धा ने कथित तौर पर बताया कि उसका एक आईफोन नेपाल में गुम हो गया था. चौथे मोबाइल के बारे में उसने अपने पास नहीं होने की बात कही.
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी में है, ताकि कॉल, संदेश और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों का पता लगाया जा सके.
लखनऊ से नेपाल तक कैसे पहुंचे आरोपी?
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि दुबग्गा निवासी आमिर उन्हें लखनऊ से लेकर निकला था. इसके बाद वे सीतापुर पहुंचे और फिर बहराइच के रुपईडीहा के रास्ते नेपाल चले गए.
पुलिस ने श्रद्धा से ट्रॉली बैग पीछे छोड़ने और बुर्का पहनने की वजह भी पूछी. श्रद्धा ने कथित तौर पर कहा कि पहचान छिपाने और कम ध्यान आकर्षित करने के लिए उसने ट्रॉली बैग छोड़ दिया था. नेपाल से महाराजगंज की ओर लौटते समय जिस इलाके से वे गुजरे, वहां मुस्लिम आबादी अधिक होने के कारण उसने बुर्का पहना था.
8 और 9 अक्टूबर की रात कहां थे श्रद्धा और शिवा?
पूछताछ के दौरान पुलिस ने 8 और 9 अक्टूबर की रात की गतिविधियों के बारे में भी सवाल किए. सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा ने बताया कि वे पार्टी करने गए थे और रातभर बाहर रहने के बाद 9 अक्टूबर की सुबह करीब सात बजे फ्लैट पर पहुंचे थे.
शिवा के शरीर पर मेकअप को लेकर क्या कहा?
शिवा के शरीर पर मेकअप और लिपस्टिक के निशान मिलने से जुड़े सवाल पर श्रद्धा ने कथित तौर पर कहा कि शिवा उसका बॉयफ्रेंड था और उसके शरीर पर उसकी लिपस्टिक के निशान थे. उसने दावा किया कि दोनों साथ सो रहे थे और इसी दौरान उसकी नींद खुली, जिसके बाद शिवा उसके सामने फ्लैट से कूद गया. श्रद्धा ने यह भी कहा कि घटना को लेकर उसका बयान वही है, जो वह पहले एक इंटरव्यू में दे चुकी है.
सरेंडर करने के बजाय फरार क्यों हुई श्रद्धा?
पुलिस ने श्रद्धा से पूछा कि यदि वह आत्मसमर्पण करने की योजना बना रही थी, तो फिर फरार क्यों हुई. सूत्रों के अनुसार, उसने बताया कि अग्रिम जमानत, सरेंडर और एफआईआर रद्द कराने की कानूनी प्रक्रिया में समय लग सकता था.
श्रद्धा के मुताबिक, ड्राइवर दानिश ने उसे आशंका जताई थी कि पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने पर उसकी पिटाई हो सकती है. इसके बाद दोनों लखनऊ में हाईकोर्ट के वकील से मिलने के बाद वहां से निकल गए. यह विवरण आरोपियों के कथित बयानों पर आधारित है.
क्या विदेश भागने की योजना थी?
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि नेपाल से लौटने के बाद वे देश छोड़ने के बारे में भी सोच रहे थे. हालांकि, पुलिस की ओर से लुकआउट नोटिस जारी किए जाने के कारण हवाई यात्रा करना मुश्किल हो गया था.
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के पास फरारी के दौरान खर्च के लिए पैसे कहां से आए. आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि वे फ्लैट में मौजूद नकदी लेकर निकले थे और उनके पास केवल 25 हजार रुपये बचे थे. उन्होंने यह भी कहा कि फरारी के दौरान वे कैब चालकों को मांगी गई रकम से अधिक पैसे दे रहे थे.
नागपुर तक पहुंचने की कहानी
पुलिस ने आरोपियों से नागपुर में ठहरने की व्यवस्था के बारे में भी सवाल किए. शुरुआत में उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन बाद में कथित तौर पर बताया कि उन्होंने ऑनलाइन फ्लैट बुक किया था.
सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने 18 और 19 अक्टूबर की रात कुछ समय के लिए गोविंदनगर इलाके के एक होटल में रुकने की बात भी कही. इसके बाद वे रात करीब डेढ़ बजे वहां से निकले और फतेहपुर तथा सतना होते हुए नागपुर पहुंचे
गलत आईपी एड्रेस के कारण पुलिस को हुई परेशानी
जांच के दौरान पुलिस को एक बार गलत आईपी एड्रेस मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा. सूत्रों के अनुसार, कॉलिंग से संबंधित जानकारी में एक कंपनी की ओर से गलत आईपी एड्रेस उपलब्ध कराया गया था. पुलिस टीम उस जानकारी के आधार पर प्रयागराज पहुंच गई, लेकिन वहां जाने के बाद पता चला कि आईपी एड्रेस सही नहीं था.
कैब ड्राइवर के हॉटस्पॉट से की गई वॉट्सऐप कॉलिंग
पुलिस के मुताबिक, श्रद्धा वॉट्सऐप कॉलिंग के लिए अधिकतर अपने ड्राइवर दानिश के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करती थी. नागपुर जाते समय उसने कथित तौर पर एक कैब ड्राइवर से हॉटस्पॉट भी लिया था.
सूत्रों के अनुसार, कैब ड्राइवर ने 19 अक्टूबर की देर शाम आरोपियों को नागपुर छोड़ा था. पुलिस अब डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और यात्रा से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फरारी के दौरान आरोपियों ने किन लोगों से संपर्क किया और उन्हें किस-किस ने मदद पहुंचाई.