भारत की आबादी और संसाधनों की सटीक तस्वीर जानने के लिए बहुप्रतीक्षित 16वीं जनगणना 2027 की तैयारियां अब जोर पकड़ चुकी हैं। केंद्र सरकार ने हाल ही में इस विशाल कार्य के लिए औपचारिक रोडमैप जारी कर दिया है, जिसमें बताया गया है कि यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल होगी और इसमें नागरिकों को भी अपनी जानकारी खुद दर्ज करने का विकल्प मिलेगा। जानिए क्या है जनगणना का यह नया खाका और कब शुरू होगा पहला चरण।
जनगणना 2027 के लिए जारी रोडमैप में, सरकार ने दो प्रमुख चरणों की समयरेखा स्पष्ट की है:
पहला चरण: हाउस-लिस्टिंग (अप्रैल 2026)
जनगणना का पहला चरण, जिसे ‘हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहा जाता है, 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच पूरे देश में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान हर घर, उसके ढांचे, सुविधाओं और रहन-सहन से जुड़ी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज की जाएगी। प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में यह काम 30 दिन की अवधि के भीतर पूरा करना होगा। इसके बाद, जनसंख्या गणना (लोगों से जुड़ी विस्तृत जानकारी) फरवरी-मार्च 2027 में जुटाई जाएगी।
डिजिटल प्रक्रिया और सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प
इस बार की जनगणना को आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए आयोजित किया जाएगा, जिससे डेटा की सटीकता और गति दोनों बढ़ेंगी। यह पहली बार होगा जब इतनी बड़ी संख्या में घरों और जनसंख्या की जानकारी मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से संग्रहीत की जाएगी।
सबसे अहम बदलाव ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (Self-Enumeration) का विकल्प है। नागरिक अब घर-घर के दौरे से पहले ही डिजिटल रूप से अपनी मूलभूत जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे, जिससे डेटा कलेक्शन की प्रक्रिया और भी तेज और सटीक बनेगी।
नीतियों को मिलेगी नई दिशा
यह जनगणना केवल आबादी की संख्या गिनने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की नई सामाजिक-आर्थिक तस्वीर तैयार करने वाली प्रक्रिया है। डिजिटल तकनीक से संग्रहीत यह विस्तृत जानकारी भविष्य की सरकारी योजनाओं, नीतियों (जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास) और विकास की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।
आने वाले महीनों में इस डिजिटल पहल के विस्तृत दिशानिर्देश सामने आएंगे, जो सशक्त नीति निर्माण और देश के सुनहरे भविष्य का आधार बनेंगे।









