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आंतरिक विद्रोह के बाद ईरान का ‘महायुद्ध’ प्लान: 2000 मिसाइलों से इजरायल पर हमले की तैयारी?

ईरान में विद्रोह दबा, अब युद्ध की तैयारी तेज

ईरान में हाल ही में हुए जबरदस्त सरकार विरोधी प्रदर्शनों को शासन ने भले ही बेरहमी से कुचल दिया हो, लेकिन तेहरान के भीतर की शांति छलावा मात्र है। विशेषज्ञ अब चेतावनी दे रहे हैं कि आंतरिक विद्रोह को दबाने के बाद ईरानी नेतृत्व अब अपनी सत्ता बचाने के लिए सबसे खतरनाक रास्ता चुन रहा है: इजरायल और अमेरिका के साथ सीधा टकराव। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान एक बड़े सैन्य हमले की तैयारी में जुटा है, जिससे पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण युद्ध के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है।

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के नेतृत्व वाला इस्लामिक शासन लगातार विरोध प्रदर्शनों (जो महंगाई, बेरोजगारी और सख्त इस्लामिक नियमों के खिलाफ थे) को कुचलने में सफल रहा है। हजारों लोगों की गिरफ्तारी और कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में हजारों प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के दावे के बाद, शासन ने अपनी रणनीति बदल दी है। रक्षा और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अंदरूनी डर से बचने के लिए, ईरानी नेतृत्व अब बाहरी दुश्मन के साथ टकराव मोल ले रहा है और अपनी सैन्य ताकत दिखाने की तैयारी कर रहा है।

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और परमाणु कार्यक्रम की रफ्तार बहुत तेज कर दी है। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान एक साथ करीब 2000 मिसाइलें दागने की तैयारी कर रहा है, ताकि इजरायल को अभूतपूर्व झटका दिया जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान चीनी तकनीक की मदद से 24 घंटे चलने वाली प्रोडक्शन लाइनों के माध्यम से अपनी हाइपरसोनिक मिसाइल क्षमता को कई गुना बढ़ा रहा है। पिछले टकराव में ईरान ने करीब 550 बैलिस्टिक मिसाइलें और 1000 से ज्यादा ड्रोन लॉन्च किए थे, लेकिन अब हालात उससे भी ज्यादा खतरनाक बताए जा रहे हैं।

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, परमाणु मोर्चे पर भी हालात बेहद चिंताजनक हैं। ईरान के पास करीब 400 किलो यूरेनियम ऐसा है जिसे 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया जा चुका है। यदि इसे 90 प्रतिशत तक बढ़ाया जाता है, तो इससे लगभग 10 परमाणु बम बनाए जा सकते हैं। यही वजह है कि ईरान का परमाणु बातचीत से बार-बार इनकार करना दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। इजरायल के रणनीतिक विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर अगला युद्ध शुरू हुआ तो इस बार इजरायल का जवाब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईरान के तेल ठिकानों और सीधे इस्लामिक शासन की संरचना पर हमला किया जा सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह पलटवार खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों तक भी फैल सकता है, जिससे पूरा पश्चिम एशिया युद्ध की चपेट में आ जाएगा।

आंतरिक विद्रोह को कुचलने के बाद ईरान की सत्ता और ज्यादा आक्रामक हो चुकी है। इजरायल और अमेरिका के खिलाफ खतरनाक सैन्य और परमाणु तैयारी चल रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इजरायल ने दोबारा हमला किया, तो इस बार ईरान कोई सीमा नहीं मानेगा, और यही वजह है कि पश्चिम एशिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां से पीछे लौटना बेहद मुश्किल हो सकता है।