शेयर बाजार में अचानक मची भगदड़ को रोकने के लिए आज साउथ कोरिया के मार्केट में सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा. आखिर सर्किट ब्रेकर क्या होता है और यह कैसे निवेशकों के करोड़ों रुपये डूबने से बचाता है. जानिए पूरी डिटेल…
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात है। कभी बाजार तेजी से ऊपर जाता है तो कभी अचानक भारी गिरावट देखने को मिलती है। लेकिन जब यह गिरावट इतनी तेज हो जाए कि पूरे बाजार में घबराहट फैलने लगे और निवेशक अंधाधुंध बिकवाली करने लगें, तब बाजार को संभालने के लिए कुछ विशेष सुरक्षा उपाय लागू किए जाते हैं। इन्हीं में से दो महत्वपूर्ण तंत्र हैं – सर्किट ब्रेकर और साइडकार।
23 जून 2026 को साउथ कोरिया के शेयर बाजार में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली। टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में भारी बिकवाली के कारण देश का प्रमुख शेयर सूचकांक KOSPI इंट्राडे में 8 प्रतिशत से अधिक टूट गया। हालात इतने खराब हो गए कि एक्सचेंज को ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। इस घटना ने दुनियाभर के निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया और एक बार फिर सर्किट ब्रेकर और साइडकार जैसे सुरक्षा तंत्र चर्चा में आ गए।
साउथ कोरिया के बाजार में आखिर हुआ क्या?
एशियाई बाजारों में पिछले कुछ समय से टेक और एआई शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही थी। लेकिन हर तेजी के बाद मुनाफावसूली भी आती है। मंगलवार को निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली शुरू कर दी।
इसका सबसे ज्यादा असर साउथ कोरिया के बाजार पर पड़ा। देश की प्रमुख चिप निर्माता कंपनी SK Hynix के शेयर 11 प्रतिशत से अधिक टूट गए, जबकि Samsung Electronics में भी लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इन बड़ी कंपनियों में बिकवाली बढ़ते ही KOSPI इंडेक्स तेजी से नीचे आने लगा और देखते ही देखते 8 प्रतिशत से अधिक गिर गया। इसके बाद कोरिया एक्सचेंज को सर्किट ब्रेकर सक्रिय करना पड़ा और कुछ समय के लिए ट्रेडिंग रोक दी गई।
क्या होता है सर्किट ब्रेकर?
सर्किट ब्रेकर शेयर बाजार का एक सुरक्षा कवच है। इसका उद्देश्य बाजार में अत्यधिक घबराहट और अनियंत्रित बिकवाली को रोकना होता है। इसे समझने के लिए अपने घर में लगे MCB (Miniature Circuit Breaker) का उदाहरण लिया जा सकता है। जब घर में शॉर्ट सर्किट होता है तो MCB बिजली की सप्लाई काट देता है ताकि बड़ा नुकसान न हो। ठीक उसी प्रकार जब शेयर बाजार में असामान्य गिरावट होती है तो सर्किट ब्रेकर ट्रेडिंग रोक देता है।
इस दौरान निवेशकों को स्थिति समझने और सोच-समझकर निर्णय लेने का अवसर मिलता है।
सर्किट ब्रेकर कैसे काम करता है?
हर देश और एक्सचेंज अपने नियमों के अनुसार सर्किट ब्रेकर की सीमा तय करता है।
साउथ कोरिया में तीन स्तर के सर्किट ब्रेकर हैं:
- 8% गिरावट – पहला स्तर
- 15% गिरावट – दूसरा स्तर
- 20% गिरावट – तीसरा स्तर
जैसे ही KOSPI में 8 प्रतिशत गिरावट आई, पहला सर्किट ब्रेकर सक्रिय हो गया और 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोक दी गई।
इसका उद्देश्य निवेशकों को “कूलिंग ऑफ पीरियड” देना था ताकि घबराहट में होने वाली बिकवाली को रोका जा सके।
भारत में सर्किट ब्रेकर के नियम क्या हैं?
भारतीय शेयर बाजार में भी सर्किट ब्रेकर लागू होते हैं।
यह मुख्य रूप से सेंसेक्स और निफ्टी की गिरावट या तेजी के आधार पर सक्रिय होते हैं।
भारत में सामान्यतः तीन स्तर होते हैं:
- 10% मूवमेंट
- 15% मूवमेंट
- 20% मूवमेंट
जब इंडेक्स इन सीमाओं को पार करता है तो बाजार में कुछ समय के लिए ट्रेडिंग रोक दी जाती है।
कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में भारतीय बाजारों में भी सर्किट ब्रेकर सक्रिय हुआ था, जब भारी वैश्विक बिकवाली के कारण बाजार अचानक टूट गया था।
शेयर बाजार में Sidecar क्या होता है?
सर्किट ब्रेकर की तरह साइडकार भी एक सुरक्षा तंत्र है, लेकिन इसका काम थोड़ा अलग होता है। आज के समय में शेयर बाजार का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर आधारित एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग (Algo Trading) से संचालित होता है। बड़े फंड, बैंक और संस्थागत निवेशक कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए सेकंडों में लाखों ऑर्डर भेजते हैं। जब बाजार में अचानक बड़ी गिरावट आती है, तो यही एल्गोरिदम तेजी से बिकवाली शुरू कर देते हैं, जिससे बाजार और तेजी से गिर सकता है। ऐसी स्थिति में एक्सचेंज “साइडकार” लागू करता है।
Sidecar लागू होने पर क्या होता है?
साइडकार लागू होने के बाद:
- एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग सीमित या रोक दी जाती है।
- प्रोग्राम ट्रेडिंग पर अस्थायी नियंत्रण लगाया जाता है।
- बड़े निवेशकों के ऑटोमैटिक ऑर्डर धीमे किए जाते हैं।
- बाजार को स्थिर होने का समय मिलता है।
साउथ कोरिया में आज सुबह KOSPI बाजार में केवल 5 मिनट के लिए साइडकार लगाया गया था ताकि एल्गो ट्रेडिंग के दबाव को कम किया जा सके।
सर्किट ब्रेकर और साइडकार में क्या अंतर है?
| सर्किट ब्रेकर | साइडकार |
|---|---|
| पूरे बाजार की ट्रेडिंग रोकता है | केवल प्रोग्राम ट्रेडिंग को नियंत्रित करता है |
| अत्यधिक गिरावट या तेजी पर लागू होता है | अत्यधिक अस्थिरता पर लागू होता है |
| सभी निवेशकों पर लागू | मुख्य रूप से संस्थागत और एल्गो ट्रेडिंग पर प्रभाव |
| बाजार को पूरी तरह विराम देता है | बाजार चलता रहता है लेकिन ट्रेडिंग नियंत्रित होती है |
सर्किट ब्रेकर लगाने की जरूरत क्यों पड़ती है?
- निवेशकों को शांत होने का समय मिलता है, बाजार में गिरावट के दौरान निवेशक अक्सर भावनात्मक फैसले लेते हैं। ट्रेडिंग रोकने से उन्हें स्थिति समझने और विश्लेषण करने का समय मिलता है।
- एल्गोरिदमिक बिकवाली की चेन टूटती है, कई बार कंप्यूटर आधारित ट्रेडिंग बाजार में गिरावट को और बढ़ा देती है। सर्किट ब्रेकर इस चेन रिएक्शन को रोक देता है।
- अफवाहों पर रोक लगती है, कई बार बाजार अफवाहों या अधूरी जानकारी के कारण भी गिरता है। ट्रेडिंग रुकने से निवेशकों और नियामकों को वास्तविक कारण समझने का मौका मिलता है।
- वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनी रहती है, यदि बाजार बिना किसी नियंत्रण के लगातार गिरता रहे तो इससे पूरे वित्तीय तंत्र पर असर पड़ सकता है। सर्किट ब्रेकर ऐसी स्थिति को नियंत्रित करता है।
क्या सर्किट ब्रेकर बाजार को पूरी तरह बचा सकता है?
इसका जवाब है – नहीं, सर्किट ब्रेकर बाजार की दिशा नहीं बदलता और न ही गिरावट को हमेशा रोक सकता है। यह केवल बाजार को संभलने का समय देता है। यदि गिरावट के पीछे मजबूत आर्थिक कारण हैं, तो बाजार बाद में फिर गिर सकता है। लेकिन सर्किट ब्रेकर यह सुनिश्चित करता है कि बाजार में अराजकता और घबराहट के कारण स्थिति और खराब न हो।
निवेशकों को क्या सीख लेनी चाहिए?
साउथ कोरिया की घटना निवेशकों को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों सामान्य हैं। जब बाजार में अचानक भारी उतार-चढ़ाव आए तो घबराकर निर्णय लेने के बजाय तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर फैसला करना चाहिए। सर्किट ब्रेकर और साइडकार जैसे तंत्र इसी उद्देश्य से बनाए गए हैं ताकि निवेशकों को सोचने का समय मिले और बाजार में स्थिरता बनी रहे। यही कारण है कि दुनिया के लगभग सभी बड़े शेयर बाजारों में ऐसे सुरक्षा तंत्र मौजूद हैं। वे बाजार को गिरने से नहीं रोकते, लेकिन उसे बेकाबू होने से जरूर बचाते हैं।


