PMO ने माँगा ट्रस्ट से चंदे और वित्तीय रिकॉर्ड का ब्यौरा, लेकिन ट्रस्ट के तरफ से SIT जांच का हवाला देकर जानकारी देने से इनकार कर दिया गया, अब जांच रिपोर्ट, वित्तीय पारदर्शिता और ट्रस्ट में संभावित बड़े बदलाव पर सभी की नजर टिकी है। जानिए पूरी रिपोर्ट।
अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा चोरी मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजी गई शिकायत के आधार पर जिला प्रशासन ने ट्रस्ट से आय-व्यय, दान, बैंक खातों, जमीन खरीद-बिक्री और संपत्तियों का विवरण मांगा था, लेकिन ट्रस्ट ने यह जानकारी देने से इनकार कर दिया। ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय ने इसकी वज़ह चल रही SIT जांच को बताया है।
भाजपा नेता की शिकायत के बाद बढ़ा मामला
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर मंदिर ट्रस्ट की स्थापना से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने दान राशि, समर्पण निधि, बैंक खातों, जमीन सौदों और ऑडिट रिपोर्टों को सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई, शिकायत के बाद PMO ने मामले को अयोध्या जिला प्रशासन के पास आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया, प्रशासन की ओर से ट्रस्ट से विस्तृत वित्तीय जानकारी मांगी गई थी। हालांकि, चंपतराय ने प्रशासन को बताया कि मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) कर रही है और सभी दस्तावेज पहले से जांच एजेंसी के पास उपलब्ध हैं। इसलिए फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की जा सकती। इस जवाब के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
SIT रिपोर्ट में कई खामियों का दावा
सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी मामले की जांच के दौरान SIT को कई स्तरों पर गंभीर गड़बड़ मिली हैं। जांच में न केवल ट्रस्ट प्रबंधन बल्कि दान राशि की गणना में शामिल कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि जांच टीम ने प्रदेश सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें कई सुधारात्मक सुझाव और कार्रवाई की सिफारिशें शामिल हैं। राम मंदिर में आने वाली नकदी की गणना का दायित्व स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI) को सौंपा गया है। बैंक के नौ कर्मचारी लंबे समय से यह कार्य कर रहे हैं। चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद भी इन्हीं कर्मचारियों से गणना कराए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच के बावजूद न तो बैंक स्टाफ बदला गया है और न ही नकदी संग्रहण प्रक्रिया में शामिल एजेंसी को हटाया गया है। इससे मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
150 से अधिक लोगों से पूछताछ
SIT अब तक करीब 150 कर्मचारियों, सेवादारों और संबंधित लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच में ऐसे कई लोगों की पहचान की गई है जिनकी आर्थिक स्थिति रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अचानक मजबूत हुई है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी ऐसे मामलों की भी पड़ताल कर रही है जहां आय और संपत्ति में असामान्य वृद्धि देखी गई है। जानकारी के मुताबिक SIT ने पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे और वित्तीय रिकॉर्ड का विशेष ऑडिट कराने की सिफारिश की है। इसके साथ ही दान राशि की निगरानी और गणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के सुझाव भी दिए गए हैं। रिपोर्ट में ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
क्या ट्रस्ट में होगा बड़ा बदलाव?
जांच के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बनाया जा सकता है, नृपेंद्र मिश्र पहले भी ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और हाल ही में उन्होंने दान राशि में हुई कथित खामियों को गंभीर मामला बताते हुए वित्तीय निगरानी मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया था।
बढ़ सकती है राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल
राम मंदिर देश की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परियोजनाओं में से एक है। ऐसे में चढ़ावा चोरी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजर SIT की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
यदि जांच में खामियों की पुष्टि होती है, तो ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


