5 साल में कितना बदला उत्तराखंड? धामी सरकार का पूरा रिपोर्ट कार्ड

सीएम पुष्कर सिंह धामी
सीएम पुष्कर सिंह धामी

पांच साल के कार्यकाल में धामी सरकार ने UCC, नकल विरोधी कानून और चारधाम विकास जैसे बड़े फैसलों से सुर्खियां बटोरीं, लेकिन रोजगार, पलायन और स्वास्थ्य जैसी चुनौतियां अब भी सरकार की अगली बड़ी परीक्षा बनी हुई हैं।

उत्तराखंड की राजनीति में पिछले पांच वर्ष कई मायनों में अहम रहे हैं, जुलाई 2021 में मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने वाले पुष्कर सिंह धामी ने अपेक्षाकृत युवा नेतृत्व के साथ राज्य की कमान संभाली, इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने दोबारा सत्ता हासिल की और धामी लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने, जुलाई 2026 में उनके नेतृत्व के पांच वर्ष पूरे होने के साथ ही यह कार्यकाल प्रशासनिक सुधारों, बड़े नीतिगत फैसलों और राजनीतिक स्थिरता के लिहाज से चर्चा का विषय बन गया है।

इन वर्षों में सरकार ने कानून-व्यवस्था, भर्ती प्रणाली, धार्मिक पर्यटन, निवेश, डिजिटल प्रशासन, आधारभूत ढांचे और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कई पहलें कीं, वहीं दूसरी ओर बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसे मुद्दे लगातार सरकार के सामने बड़ी चुनौती बने रहे।

युवा नेतृत्व से स्थिर शासन तक

जब पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद संभाला, तब उत्तराखंड लगातार नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा था, ऐसे में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी, धामी सरकार ने विभागों के बीच बेहतर समन्वय, तेज निर्णय प्रक्रिया और समयबद्ध कार्य संस्कृति विकसित करने पर जोर दिया, कई विभागों में ई-ऑफिस, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डिजिटल सेवाओं का विस्तार भी इसी अवधि में हुआ, जिससे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने की कोशिश की गई, ऐसे में लगातार पांच वर्ष तक नेतृत्व बनाए रखना अपने आप में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि माना जाता है।

भर्ती परीक्षाओं में सुधार और नकल विरोधी कानून

धामी सरकार के शुरुआती कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के मामलों ने युवाओं में भारी नाराजगी पैदा की, सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए देश के सबसे सख्त नकल विरोधी कानूनों में से एक लागू किया, परीक्षा प्रणाली की निगरानी मजबूत की गई, दोषियों पर कार्रवाई हुई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के प्रयास किए गए, सरकार का दावा है कि इन कदमों से प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं का भरोसा दोबारा कायम हुआ।

समान नागरिक संहिता (UCC) बना सबसे बड़ा फैसला

धामी सरकार के कार्यकाल का सबसे चर्चित और ऐतिहासिक निर्णय समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लागू करने की दिशा में उठाया गया कदम रहा, उत्तराखंड इस कानून को लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना, सरकार का कहना है कि इससे सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी, जबकि विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने इस विषय पर अलग-अलग मत रखे, यह फैसला राज्य की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया।

सिलक्यारा सुरंग रेस्क्यू ने दिखाई समन्वय क्षमता

उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में मजदूरो के फंसने की घटना पूरे देश के लिए चिंता का विषय बनी, कई दिनों तक चले कठिन बचाव अभियान में राज्य सरकार, केंद्र सरकार, विभिन्न एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने मिलकर काम किया, अंततः सभी मजदूरो को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, इस अभियान ने आपदा प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय और संकट के समय त्वरित निर्णय लेने की क्षमता को भी सामने रखा।

आपदा प्रबंधन को नई दिशा

उत्तराखंड हर वर्ष भूस्खलन, बादल फटने और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है, पिछले पांच वर्षों में सरकार ने प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, राहत एवं बचाव कार्यों में तकनीक के उपयोग, सड़क संपर्क बहाल करने और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय पर जोर दिया, चारधाम यात्रा के दौरान मौसम की निगरानी और कंट्रोल रूम की व्यवस्था को भी पहले से अधिक मजबूत किया गया।

धार्मिक पर्यटन और आधारभूत ढांचे पर फोकस

धामी सरकार ने धार्मिक पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार माना, चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं में सुधार, सड़क चौड़ीकरण, पार्किंग, यात्री सुविधाओं, रोपवे परियोजनाओं और सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया, इसके साथ ही पुलों, स्वास्थ्य संस्थानों और शहरी विकास परियोजनाओं में भी निवेश बढ़ाने की कोशिश हुई।

निवेश और औद्योगिक विकास की कोशिश

सरकार ने निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की और उद्योगों के लिए नई नीतियां लागू कीं, सरकार का दावा है कि विभिन्न क्षेत्रों में बड़े निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनसे भविष्य में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश का वास्तविक प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब ये प्रस्ताव धरातल पर उद्योग और रोजगार में बदलेंगे।

महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान

महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया गया, सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण, स्वरोजगार योजनाएं और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने वाले कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई, सरकार ने महिला सुरक्षा और आर्थिक भागीदारी बढ़ाने को भी अपनी प्रमुख नीतियों में शामिल किया।

डिजिटल प्रशासन की ओर बढ़ते कदम

पिछले पांच वर्षों में सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करने की दिशा में कई पहलें की गईं, शिकायत निवारण प्रणाली, प्रमाणपत्रों की ऑनलाइन उपलब्धता, ई-ऑफिस और विभागों के बीच डिजिटल डेटा साझा करने जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया, इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना रहा।

कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही

सरकार ने कानून-व्यवस्था मजबूत करने, अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने पर भी जोर दिया, विभिन्न जिलों में नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी की गई, सरकार का कहना है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई।

रोजगार और पलायन जैसी चुनौतियां बरकरार

सरकार जहां अपनी उपलब्धियों को प्रमुखता से गिनाती रही, वहीं विपक्ष ने बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा और सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दों को लगातार उठाया, विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, पर्वतीय जिलों से पलायन रोकना और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

आगे का रोडमैप

राज्य सरकार ने वर्ष 2035 तक उत्तराखंड को विकास के नए स्तर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, इसके लिए पर्यटन, निवेश, कृषि, उद्योग, डिजिटल सेवाओं और आधारभूत ढांचे के विस्तार पर लगातार काम करने की योजना है, साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करना, स्थानीय रोजगार बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास सुनिश्चित करना भी भविष्य की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

धामी सरकार के पांच वर्ष

पुष्कर सिंह धामी का पांच वर्षीय कार्यकाल उत्तराखंड की राजनीति में कई बड़े नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा। समान नागरिक संहिता लागू करने की पहल, भर्ती परीक्षाओं में सुधार, सिलक्यारा रेस्क्यू के दौरान प्रभावी समन्वय, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, निवेश आकर्षित करने के प्रयास और डिजिटल प्रशासन इस कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों में गिनवाए गए।

हालांकि रोजगार, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों का संतुलित विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसी चुनौतियां अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। किसी भी सरकार का अंतिम मूल्यांकन उसके घोषित लक्ष्यों और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों के आधार पर होता है। आने वाले वर्षों में धामी सरकार की नीतियों की सफलता भी इसी कसौटी पर परखी जाएगी।

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