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ब्रज में गूंजी ‘होरी रे रसिया’: फुलैरा दौज से शुरू हुई रंगोत्सव की धूम, ठाकुरजी ने भक्तों संग खेली गुलाल की होली

ब्रज के राधाबल्लभ मंदिर में फुलैरा दौज पर ठाकुरजी और भक्तों द्वारा खेली जा रही गुलाल की होली।

ब्रजमंडल में रंगोत्सव का उल्लास अपने चरम पर पहुंचने लगा है! फाल्गुन मास की पावन ‘फुलैरा दौज’ के अवसर पर, कान्हा की नगरी के मंदिरों में होली की विधिवत धूम आज से शुरू हो गई है। यह ऐसा मौका है जब ब्रज की आध्यात्मिक भावना रंगों के त्योहार में घुलमिल जाती है।

सुप्रसिद्ध ठाकुर राधाबल्लभ मंदिर सहित ब्रज के कई प्रमुख देवालयों में ठाकुरजी ने कमर में फेंटा बांधकर अपने भक्तों पर गुलाल की बौछार की। इससे पूरा मंदिर परिसर अबीर-गुलाल के रंगीन बादलों से सराबोर हो गया, और श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमने लगे। राधाबल्लभ मंदिर में, सेवायत गोस्वामियों ने परंपरा के अनुसार ठाकुरजी के कपोलों पर गुलाल लगाकर होली खेलने का निमंत्रण दिया।

मंदिर के सेवायत सूरज गोस्वामी ने इस अवसर पर बताया कि बसंत पंचमी से शुरू हुई होली की प्रतीकात्मक शुरुआत अब पूर्ण रंगत में बदल गई है। उन्होंने कहा, “आज सुबह ठाकुरजी ने श्वेत पोशाक धारण की और कमर में फेंटा बांधकर भक्तों पर प्रसादी गुलाल उड़ाया।” ब्रज की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी से फुलैरा दौज तक मंदिरों में केवल होली के पदों का गायन होता है, लेकिन फुलैरा दौज से ठाकुरजी के विग्रह की कमर पर फेंटा बांधने की रस्म के साथ ही गुलाल और रंगों की सक्रिय होली आरंभ हो जाती है।

राधाबल्लभ मंदिर के अलावा सेवाकुंज, ठाकुर राधादामोदर मंदिर, राधाश्यामसुंदर मंदिर और प्रियाबल्लभ मंदिर में भी होली का विशेष उल्लास देखने को मिला। देश-विदेश से आए श्रद्धालु ठाकुरजी के प्रसादी रंग में रंगकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं।

फुलैरा दौज के इस भव्य आयोजन के साथ ही, अब समूचे ब्रजमंडल में होली का आधिकारिक काउंटडाउन शुरू हो गया है, जो आने वाले दिनों में और भी उत्साह और रंगों से भर जाएगा।