रायपुर: छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सामने आने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। विधानसभा के मानसून सत्र में पेश इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2019-20 से 2023-24 के दौरान प्रदेश में 1 प्रतिशत से भी कम परिवारों को 100 दिनों का गारंटीड रोजगार मिल सका। रिपोर्ट में रोजगार उपलब्ध कराने, मजदूरी भुगतान और योजना के क्रियान्वयन में कई गंभीर अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।
1% से भी कम परिवारों को मिला 100 दिन का रोजगार
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, समीक्षा अवधि में 1 करोड़ 52 लाख 36 हजार परिवारों ने मनरेगा के तहत काम की मांग की, लेकिन 1 करोड़ 34 लाख 10 हजार परिवारों को ही रोजगार मिल पाया। वहीं 18 लाख 26 हजार परिवारों को न तो रोजगार दिया गया और न ही नियमों के अनुसार बेरोजगारी भत्ता मिला।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जिन परिवारों को काम मिला, उनमें से 83 प्रतिशत परिवार 100 दिन का न्यूनतम गारंटीड रोजगार भी पूरा नहीं कर सके। केवल 1 लाख 23 हजार परिवार (करीब 0.92%) को ही 100 दिनों का रोजगार मिला, जबकि 21 लाख 56 हजार परिवारों को 100 दिन से अधिक काम दिया गया।
CAG ने गिनाईं कई गंभीर खामियां
रिपोर्ट के मुताबिक मनरेगा के संचालन में कई स्तरों पर नियमों का पालन नहीं किया गया। श्रम बजट तैयार करने से पहले परिवारों का सर्वे नहीं कराया गया और कई स्थानों पर ग्राम सभा से आवश्यक अनुमोदन भी नहीं लिया गया।
इसके अलावा, पर्याप्त धन उपलब्ध होने के बावजूद मजदूरों को समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मनरेगा श्रमिकों के 29.62 करोड़ रुपये के पीएफ अंशदान का भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण सरकार पर 84.59 करोड़ रुपये की ब्याज और दंड की देनदारी आ गई।
61% कार्य ही समय पर हुए पूरे
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-24 के दौरान स्वीकृत परियोजनाओं में से केवल 61 प्रतिशत कार्य ही निर्धारित समय में पूरे हो सके। सोशल ऑडिट की प्रक्रिया में भी लापरवाही सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया कि सोशल ऑडिट के लिए उपलब्ध बजट का पूरा उपयोग नहीं किया गया और आवश्यक पदों पर नियुक्तियां भी नहीं की गईं।
रिपोर्ट पर तेज हुई सियासत
सीएजी रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार के मंत्रियों ने कांग्रेस पर निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि पिछली सरकार मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन में विफल रही। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए सरकार पर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया है।
रोजगार व्यवस्था पर उठे सवाल
मनरेगा को ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में माना जाता है। ऐसे में सीएजी की रिपोर्ट ने रोजगार उपलब्ध कराने, मजदूरी भुगतान और योजना के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ योजना की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर भी बहस तेज हो गई है।