कांग्रेस पार्टी को अपने राष्ट्रीय मुख्यालय 24 अकबर रोड और 5 रायसीना रोड को खाली करने के नोटिस मिले हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, इन परिसरों को खाली करने की अंतिम तारीख 28 मार्च तय की गई है। यह वही जगह है जो इंदिरा गांधी के दौर से कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रही है।
48 साल पुराना मुख्यालय, कई ऐतिहासिक फैसलों का गवाह
अकबर रोड स्थित यह बंगला करीब 48 साल तक कांग्रेस का मुख्यालय रहा है। यहां से पार्टी ने कई बड़े राजनीतिक फैसले लिए और यह स्थान पार्टी की विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि पिछले साल ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के बाद भी पार्टी की कई गतिविधियां अभी तक इसी परिसर से संचालित हो रही हैं।
कानूनी विकल्पों पर विचार में पार्टी
इस मामले में कांग्रेस अब अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। पार्टी सरकार से कुछ समय की मोहलत भी मांग सकती है। साथ ही ऐसी रणनीति पर भी काम हो रहा है, जिसमें किसी वरिष्ठ नेता को राज्यसभा लाकर उनके नाम पर इस आवास का आवंटन संभव हो सके।
प्रतीकात्मक और राजनीतिक महत्व का मुद्दा
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अकबर रोड स्थित यह दफ्तर सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पार्टी की पहचान और इतिहास से जुड़ा प्रतीक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी इस संपत्ति के लिए बाजार दर पर किराया अदा कर रही है।
सिंघवी ने बताया अवैध और राजनीतिक कदम
कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे अवैध और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। सिंघवी ने स्पष्ट कहा कि पार्टी इन नोटिसों के खिलाफ सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेगी और जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएगी।









