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दादा के निधन के बीच आई सफलता की खबर, गाजीपुर की आकांक्षा सिंह ने यूपीएससी में पाई 301वीं रैंक

यूपीएससी 2025 का रिजल्ट एक दिन पूर्व जारी हुआ तो इसमें क्वालीफाई करने वाले अभ्यर्थियों के साथ ही उनके परिवार के लोगों में काफी खुशी देखने को मिली। अगर गाजीपुर की बात करें तो यहां करीब 8 से 10 अभ्यर्थियों ने यूपीएससी की इस परीक्षा में सफलता हासिल की है। लेकिन पूरे देश में आकांक्षा सिंह के नाम को लेकर एक कंट्रोवर्सी भी शुरू हो गई थी।

गाजीपुर जिले के जमानिया तहसील के अभईपुर गांव की रहने वाली आकांक्षा सिंह, जो वर्तमान में पटना एम्स में डॉक्टर हैं, जब यह खबर सामने आई कि यूपीएससी 2025 में 301वीं रैंक पर आकांक्षा सिंह का नाम है, तो कुछ देर के लिए वह भी हैरान रह गईं। हालांकि जब उन्होंने बारीकी से इस बारे में जानकारी की तो पता चला कि 301वीं रैंक पर चयनित आकांक्षा सिंह गाजीपुर के अभईपुर गांव की ही रहने वाली हैं। इसके बाद परिवार के साथ-साथ गांव में भी खुशी का माहौल हो गया।

कहावत है कि दादा-दादी की जान पोते-पोतियों में बसती है। वे अपने जीते जी उनके भविष्य की चिंता करते हैं, लेकिन गाजीपुर के अभईपुर गांव से जो मामला सामने आया, उसने इस कहावत को एक अलग ही मायने दे दिया। दरअसल आकांक्षा सिंह के दादा राममूरत सिंह का कुछ दिनों पहले निधन हो गया था और उनके घर में गरुड़ पुराण का कार्यक्रम चल रहा था। पूरा परिवार शोक के माहौल में बैठकर गरुड़ पुराण सुन रहा था।

इसी दौरान आकांक्षा के एक दोस्त का फोन आया और उसने बताया कि यूपीएससी रिजल्ट में 301वीं रैंक पर आपका नाम है। यह खबर सुनते ही जहां पहले से घर में गम का माहौल था, वहीं इस खबर ने पूरे परिवार को खुशी से भर दिया।

हालांकि यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं रही, क्योंकि कुछ देर बाद खबर आई कि बिहार के आरा जिले की रहने वाली एक अन्य आकांक्षा सिंह भी 301वीं रैंक पर अपना दावा कर रही हैं। इसके बाद कुछ देर के लिए भ्रम की स्थिति बन गई।

इसके बाद आकांक्षा सिंह ने अपने दोस्तों और परिचितों को अपना रोल नंबर और अन्य दस्तावेज भेजे। दोस्तों ने यूपीएससी की वेबसाइट पर जाकर माता-पिता के नाम और अन्य विवरण से जांच की। करीब दोपहर 12 बजे के बाद यह साफ हो गया कि 301वीं रैंक गाजीपुर के अभईपुर गांव की आकांक्षा सिंह की ही है। इसके बाद परिवार में जहां शोक का माहौल था और लोग गरुड़ पुराण सुन रहे थे, वहीं इस खबर ने पूरे परिवार को खुशियों से भर दिया।

अगर आकांक्षा सिंह की बात करें तो उनका पहला सपना एमबीबीएस डॉक्टर बनना था। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और वर्तमान में पटना एम्स में नौकरी कर रही हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यूपीएससी पास करने की भी ठान रखी थी। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी।

पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर यूपीएससी परीक्षा पास कर 301वीं रैंक हासिल कर ली और अपने गांव के साथ-साथ पूरे गाजीपुर जिले का नाम रोशन कर दिया।

अगर उनके परिवार की बात करें तो आकांक्षा सिंह के परिवार में माता-पिता, एक भाई और एक बहन हैं। उनका भाई एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है। कुछ समय पहले काम के दौरान ही उसकी दोनों किडनी खराब हो गई थीं, जिसके बाद आकांक्षा की मां ने अपने बेटे को एक किडनी दान की। फिलहाल उनका भाई घर से ही वर्क फ्रॉम होम के जरिए काम कर रहा है।

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