10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी आम हड़ताल का व्यापक असर हाल ही में गाजीपुर में भी देखने को मिला। महुआबाग स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पर सैकड़ों कर्मचारियों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस हड़ताल के कारण जिले भर में करीब 300 एटीएम बंद रहे, जिससे सामान्य बैंकिंग सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुईं।
संयुक्त प्रदर्शन में बैंक, बीमा और आंगनवाड़ी कर्मियों सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार, लगभग 250 बैंक कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार की नई नीतियां श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रही हैं।
यूनियन बैंक स्टाफ एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष, संतोष कुमार ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि नई श्रम संहिताओं के माध्यम से कर्मचारियों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और बीमा संस्थानों के निजीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि इससे देश में रोजगार के अवसर कम होंगे। वक्ताओं ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार स्थायी रोजगार की जगह ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है, जिससे बेरोजगारी और श्रमिकों का शोषण बढ़ रहा है।
श्रमिक संगठनों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखते हुए केंद्र से कई महत्वपूर्ण माँगें की हैं, जिनमें ये शामिल हैं:
1. श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए।
2. बैंक और बीमा क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाई जाए तथा IDBI बैंक की प्रस्तावित बिक्री रोकी जाए।
3. पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए और नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त किया जाए।
4. आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा को समाप्त कर पर्याप्त भर्ती और स्थायी रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
5. कॉरपोरेट घरानों से बड़े एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) की सख्त वसूली की जाए और बैंक सेवा शुल्क में कमी की जाए।
आयोजकों के अनुसार, यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो यह आंदोलन और भी अधिक तेज किया जाएगा और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की संख्या बढ़ सकती है।









