ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी नौसेना की तैनाती को लेकर एक नया दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के तट के पास तैनात अमेरिकी नौसेना के कई युद्धपोत अब पहले की स्थिति में नजर नहीं आ रहे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि अमेरिकी जहाजों को ईरान के तट से दूर किया गया है। यह घटनाक्रम ईरान की कासिम बशीर (Qasem Basir) एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल की टेस्टिंग के बाद सामने आया है। इस मिसाइल की घोषित रेंज करीब 1,200 किलोमीटर बताई गई है।
सैटेलाइट तस्वीरों में नहीं दिखे अमेरिकी युद्धपोत
सूत्रों के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से सेंटिनल-2 सैटेलाइट तस्वीरों में ओमान की खाड़ी और अरब सागर के कुछ हिस्सों में पहले तैनात अमेरिकी युद्धपोत दिखाई नहीं दे रहे हैं। रिपोर्ट में USS George Washington, USS George H.W. Bush और USS Boxer के साथ तैनात कुछ डिस्ट्रॉयर का भी जिक्र किया गया है। इन जहाजों की फॉरवर्ड पोजिशन से दूरी बनाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि अमेरिकी नौसेना इस पूरे क्षेत्र से हट गई है। अमेरिकी नौसेना की 21 सितंबर की फ्लीट ट्रैकर रिपोर्ट में USS George Washington और USS George H.W. Bush समेत कई अमेरिकी युद्धपोतों की अरब सागर में मौजूदगी दर्ज की गई थी।
क्या है कासिम बशीर मिसाइल?
कासिम बशीर ईरान की मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे एंटी-शिप भूमिका में इस्तेमाल करने की क्षमता के साथ पेश किया गया है। इसकी रेंज करीब 1,200 किलोमीटर बताई गई है। मिसाइल को लेकर रिपोर्टों में कहा गया है कि इसमें ऐसे सेंसर और मार्गदर्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे समुद्र में चल रहे लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ सकती है।ईरान ने इसे अपनी मिसाइल क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी के तौर पर पेश किया है। वहीं अमेरिका ने ईरानी मिसाइल कार्यक्रम को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया है।
अमेरिकी जहाजों पर मिसाइल हमले का क्या हुआ था?
सितंबर की शुरुआत में ईरान की ओर से अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की बात सामने आई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा था कि उसके जहाजों ने हमलों से सफलतापूर्वक बचाव किया और अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने या युद्धपोतों को निश्चित नुकसान की सूचना नहीं थी।
ईरानी पक्ष ने इसके बाद दावा किया कि उसकी मिसाइल ने अमेरिकी युद्धपोतों पर दबाव बनाया। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने मिसाइल क्षमता को लेकर कई दावे किए हैं। हालांकि, इन दावों और युद्धपोतों को नुकसान पहुंचने के बीच स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया गया निष्कर्ष उपलब्ध नहीं है।
क्या अमेरिका ने ईरान की मिसाइल के डर से जहाज हटाए?
यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल है। उपलब्ध रिपोर्टों में अमेरिकी जहाजों की कुछ फॉरवर्ड पोजिशन से हटने की बात कही गई है, लेकिन यह सीधे तौर पर साबित नहीं हुआ है कि ऐसा केवल कासिम बशीर मिसाइल के खतरे की वजह से किया गया। अमेरिकी नौसेना के जहाज अभी भी अरब सागर और व्यापक क्षेत्र में ऑपरेशन कर रहे हैं। इसलिए इसे फिलहाल रणनीतिक पुनर्तैनाती या फॉरवर्ड पोजिशन में बदलाव के तौर पर भी देखा जा सकता है।
कासिम बशीर की रेंज ने बढ़ाई चिंता
करीब 1,200 किलोमीटर की घोषित रेंज के कारण कासिम बशीर ओमान की खाड़ी और उसके आसपास के समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि इस मिसाइल की क्षमता को अमेरिकी नौसैनिक तैनाती के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरानी अधिकारियों ने मिसाइल की क्षमता को अपनी नई सैन्य रणनीति का हिस्सा बताया है। वहीं अमेरिका की ओर से इस घटनाक्रम के बाद अपने युद्धपोतों की तैनाती को लेकर कोई ऐसा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिसमें जहाजों को कासिम बशीर के डर से हटाने की बात कही गई हो।
अमेरिका-ईरान तनाव में नया मोड़?
अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव पहले से जारी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ओमान की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही भी इस संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। AP के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान पर समुद्री दबाव बनाए रखा है, जबकि तेहरान ने क्षेत्र में अपने नियंत्रण और मिसाइल क्षमता को लेकर कड़े बयान दिए हैं।
ऐसे में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती में बदलाव को आने वाले दिनों में करीब से देखा जाएगा। फिलहाल उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इतना कहा जा सकता है कि अमेरिकी नौसैनिक बलों की फॉरवर्ड पोजिशन में बदलाव की रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन इसके पीछे सिर्फ ईरानी मिसाइल को कारण मानना अभी पुष्टि से परे है।