Pakistan ISI Spy Network: सोशल मीडिया अब सिर्फ बातचीत और मनोरंजन का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि कथित तौर पर जासूसी के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। एक ताजा मामले में दिल्ली में एक दंपति की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क की जांच तेज हुई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल के जरिए लोगों को निशाना बनाने और उनसे संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई।
सोशल मीडिया पर कैसे बुना जा रहा जाल?
रिपोर्ट के मुताबिक, कथित नेटवर्क में सोशल मीडिया पर आकर्षक महिला नाम और तस्वीरों वाले फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल किया जाता था। इन प्रोफाइल के जरिए पहले संभावित टारगेट से दोस्ती की जाती और धीरे-धीरे निजी बातचीत को आगे बढ़ाया जाता।
इसके बाद बातचीत को निजी या अंतरंग दिशा में ले जाकर व्यक्ति पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की जाती थी। जांच में सामने आए मामलों में कथित तौर पर इसी तरह के ‘हनीट्रैप’ का इस्तेमाल कर संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने का आरोप है।
‘न्यूडिटी’ को बनाया गया लालच और दबाव का हथियार
इस कथित जासूसी मॉड्यूल का एक अहम तरीका सोशल मीडिया पर अंतरंग तस्वीरों या कंटेंट का लालच देना बताया जा रहा है। टारगेट के साथ विश्वास कायम करने के बाद उसे निजी बातचीत में उलझाया जाता है।
इसके बाद कथित तौर पर निजी तस्वीरों या बातचीत को दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से बातचीत को लेकर लगातार सतर्क रहने की सलाह देती रही हैं।
रक्षा कर्मचारियों पर क्यों रहती है नजर?
ऐसे नेटवर्क का संभावित लक्ष्य सिर्फ सामान्य जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि रक्षा प्रतिष्ठानों, सैन्य गतिविधियों और संवेदनशील संस्थानों से जुड़ी सूचनाएं हासिल करना हो सकता है।
रिपोर्ट में हाल के कुछ मामलों का हवाला देते हुए बताया गया है कि भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी और पूर्व DRDO वैज्ञानिक समेत अन्य मामलों में सोशल मीडिया आधारित संपर्क और कथित जासूसी के एंगल की जांच हुई है।
दिल्ली में दंपति की गिरफ्तारी से खुला नेटवर्क
दिल्ली में हाल ही में एक दंपति की गिरफ्तारी ने कथित पाकिस्तान-लिंक्ड जासूसी नेटवर्क की जांच को नया मोड़ दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पर पाकिस्तान की ISI से जुड़े लोगों के लिए काम करने और भारतीय SIM कार्ड उपलब्ध कराने का आरोप है।
जांच में यह भी सामने आया कि इन SIM कार्ड्स का इस्तेमाल WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर अकाउंट सक्रिय करने के लिए किया जाता था। इसके बाद इन डिजिटल माध्यमों के जरिए कथित तौर पर पाकिस्तान से जुड़े ऑपरेटिव्स से संपर्क साधा जाता था।
सिर्फ हनीट्रैप नहीं, डिजिटल जासूसी भी बड़ी चुनौती
मामले से यह भी संकेत मिलता है कि आधुनिक जासूसी अब केवल आमने-सामने संपर्क या पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप, फर्जी पहचान और डिजिटल संचार के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा सकता है।
पहले दोस्ती, फिर भरोसा और उसके बाद संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश—यह पूरा पैटर्न सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
भारत में पाकिस्तान से जुड़े कथित हनीट्रैप मामलों का इतिहास नया नहीं है। 2024 में भी रिपोर्टों में भारतीय रक्षा अधिकारियों को आकर्षक महिला प्रोफाइल के जरिए सोशल मीडिया पर निशाना बनाए जाने की बात सामने आई थी।
हालिया मामलों से यह सवाल फिर उठ रहा है कि संवेदनशील पदों पर तैनात लोगों को सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल हनीट्रैप से बचाने के लिए साइबर सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है।
आम लोगों के लिए भी बड़ा सबक
ऐसे मामलों में सबसे अहम हथियार तकनीक नहीं, बल्कि व्यक्ति की जानकारी और सतर्कता होती है। सोशल मीडिया पर अनजान प्रोफाइल से बातचीत करते समय निजी जानकारी साझा करना, संदिग्ध लिंक खोलना या संवेदनशील तस्वीरें भेजना जोखिम पैदा कर सकता है।
खासकर रक्षा और सुरक्षा से जुड़े कर्मचारियों के लिए किसी भी अनजान डिजिटल संपर्क को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
कुल मिलाकर, दिल्ली में सामने आया मामला इस बात की ओर इशारा करता है कि जासूसी के तरीके तेजी से डिजिटल हो रहे हैं। कथित ISI नेटवर्क की जांच आगे बढ़ने के साथ यह पता लगना बाकी है कि इसके पीछे कितने लोग जुड़े थे और कितनी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की गई।