Income Tax Return Filing 2026: अगर आपने अभी तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया है, तो आज आपके पास आखिरी मौका है। अंतिम समय में ITR भरते वक्त सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि ओल्ड टैक्स रिजीम चुनें या न्यू टैक्स रिजीम। सही विकल्प चुनने से आप हजारों रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं, जबकि गलत चुनाव आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है।
क्या ITR भरते समय बदल सकते हैं टैक्स रिजीम?
नौकरीपेशा (Salaried) टैक्सपेयर्स के लिए राहत की बात यह है कि यदि आपके नियोक्ता (Employer) ने पूरे साल नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) के आधार पर TDS काटा है, तब भी आप ITR दाखिल करते समय अपनी सुविधा के अनुसार पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुन सकते हैं।
यदि 80C, 80D, HRA, होम लोन ब्याज जैसी छूटों का लाभ लेने पर आपका टैक्स कम बनता है, तो रिटर्न जमा करने से पहले टैक्स रिजीम बदल सकते हैं।
टैक्स और रिफंड पर क्या होगा असर?
ITR में चुनी गई टैक्स व्यवस्था के आधार पर आपकी अंतिम टैक्स देनदारी तय होगी।
- यदि चुनी गई टैक्स रिजीम के अनुसार आपका टैक्स कम बनता है, तो अतिरिक्त कटा हुआ TDS आपको रिफंड के रूप में मिल जाएगा।
- यदि TDS कम कटा है, तो आपको शेष टैक्स जमा करना होगा।
हालांकि, पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते समय यह सुनिश्चित करें कि 80C, 80D, HRA या अन्य कटौतियों (Deductions) से जुड़े सभी दस्तावेज आपके पास उपलब्ध हों। गलत दावा करने पर आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है।
बिजनेस और प्रोफेशन वालों के लिए अलग नियम
बिजनेस या प्रोफेशन (जैसे डॉक्टर, वकील, फ्रीलांसर, कंसल्टेंट आदि) से आय प्राप्त करने वाले करदाताओं के लिए टैक्स रिजीम बदलने के नियम अलग हैं। उन्हें हर साल रिजीम बदलने की स्वतंत्रता नहीं होती। एक बार विकल्प चुनने के बाद दोबारा बदलाव सीमित परिस्थितियों में ही संभव होता है। इसलिए ऐसे करदाताओं को निर्णय लेने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
ITR पोर्टल पर टैक्स रिजीम कैसे बदलें?
टैक्स रिजीम बदलने की प्रक्रिया काफी आसान है।
- आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करें।
- अपनी आय के अनुसार सही ITR फॉर्म (जैसे ITR-1 या ITR-2) चुनें।
- Personal Information या Tax Computation सेक्शन में जाकर Old Tax Regime या New Tax Regime का विकल्प चुनें।
- अपनी आय और लागू कटौतियों की जानकारी भरें।
- रिटर्न सबमिट करने से पहले टैक्स की दोबारा गणना कर लें।
जल्दबाजी में न करें फैसला
रिटर्न दाखिल करने से पहले पोर्टल पर उपलब्ध ITR Calculator या किसी विश्वसनीय टैक्स कैलकुलेटर की मदद से दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में अपनी टैक्स देनदारी की तुलना करें। जिस विकल्प में आपका टैक्स कम बनता हो, उसी का चयन करें। सही टैक्स रिजीम का चुनाव आपको अतिरिक्त टैक्स देने से बचा सकता है और अधिक रिफंड भी दिला सकता है।
PM पर अभद्र टिप्पणी मामले में वायरल नाबालिग लड़की ने मांगी माफी, बोली- ‘बहकावे में आकर गलती हुई’