उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दर्दनाक हादसे की भयावहता को याद करते हुए प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भावुक हो गए और मीडिया से बातचीत के दौरान उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों से 14 शव देखे हैं और इस त्रासदी के दर्द को शब्दों में बयां करना बेहद मुश्किल है।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के अनुसार, जिस इमारत में आग लगी थी वह गर्मी की छुट्टियों के दौरान एक एनिमेशन सेंटर के रूप में संचालित हो रही थी। यहां 15 से 17 वर्ष की आयु के बच्चे कार्टून निर्माण और एनिमेशन से जुड़ी तकनीकों को सीखने के लिए आते थे। हादसे के समय भी कई बच्चे सेंटर के भीतर मौजूद थे।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आग लगने के बाद सेंटर के अंदर अफरा-तफरी मच गई। बच्चे अपनी जान बचाने के लिए भवन के पिछले हिस्से की ओर भागे, लेकिन इमारत में मौजूद भारी मात्रा में लकड़ी के फर्नीचर के कारण स्थिति और भयावह हो गई। फर्नीचर में आग लगने से घना और जहरीला धुआं पूरे परिसर में फैल गया, जिससे बच्चों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका। धुएं की चपेट में आने के कारण कई बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई।
ब्रजेश पाठक ने बताया कि अब तक 15 शवों को बाहर निकाला जा चुका है, जिनमें से 14 शव उन्होंने स्वयं देखे हैं। वहीं हादसे में घायल बच्चों और अन्य लोगों को तत्काल उपचार के लिए किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMC) के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।
घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया। हालांकि बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन भवन के भीतर अब भी घना धुआं भरा हुआ है। फायर ब्रिगेड और NDRF की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। राहतकर्मी मलबे और जले हुए सामान को हटाकर इमारत के प्रत्येक कमरे की जांच कर रहे हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
डिप्टी सीएम ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव गृह और पुलिस महानिदेशक (DGP) को तत्काल मौके पर भेजा गया है। सरकार ने इस हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति की समीक्षा करेंगे। सरकार की पहली प्राथमिकता घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देना है। वहीं आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
लखनऊ का यह हृदयविदारक हादसा एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों, प्रशिक्षण केंद्रों और व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इस त्रासदी ने सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकासी प्रणाली और भवन प्रबंधन को लेकर व्यापक जांच और सुधार की आवश्यकता को भी उजागर कर दिया है।


