मध्य प्रदेश में विधानसभा में पास हुआ UCC बिल, बना देश का चौथा राज्य इससे पहले उत्तराखंड गुजरात और असम में भी पास हो चूका है UCC बिल.
मध्य प्रदेश में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक में विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कई अहम प्रावधान शामिल किए गए हैं। विधेयक के कानून बनने के बाद राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, यूसीसी लागू होने के बाद तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा विवाह के लिए हलाला जैसी किसी भी अपमानजनक या बाध्यकारी प्रथा को मानना, बढ़ावा देना या किसी को इसके लिए मजबूर करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करना और महिलाओं की गरिमा एवं सुरक्षा को मजबूत करना है।
समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए गठित समिति में शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया। समिति ने मौजूदा कानूनों का अध्ययन करने के साथ-साथ प्रदेशभर में जन-परामर्श बैठकों के माध्यम से विभिन्न वर्गों से सुझाव भी लिए।
जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एक समर्पित वेब पोर्टल भी शुरू किया। इसके अलावा 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए और जिला व राज्य स्तर पर 50 जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान 1,134 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। सरकार का दावा है कि परामर्श प्रक्रिया में शामिल करीब 94 प्रतिशत लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया।