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खुद MBBS में लिया एडमिशन, अब दूसरे छात्रों के लिए बने Solver, NEET Re-Exam में बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़

NEET Re-Exam 2026 के दौरान बिहार में एक ऐसे सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है जिसने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस नेटवर्क में शामिल कई आरोपी देश के प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में पढ़ाई कर रहे छात्र बताए जा रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि MBBS, Nursing और Medical Internship कर रहे कुछ छात्र पैसे लेकर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी भी शामिल हैं।

कैसे हुआ पूरे नेटवर्क का खुलासा?

पुलिस के अनुसार मामले की शुरुआत परीक्षा केंद्र पर मौजूद एक संदिग्ध व्यक्ति से हुई। वह खुद को बायोमेट्रिक कंपनी का कर्मचारी बता रहा था, लेकिन उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान उसकी पहचान पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के तृतीय वर्ष के MBBS छात्र मयंक कश्यप के रूप में हुई।
मयंक से पूछताछ के बाद पुलिस को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले। इसके आधार पर लखीसराय समेत विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर छापेमारी की गई, जहां से कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया। धीरे-धीरे जांच आगे बढ़ी और एक बड़े सॉल्वर नेटवर्क का खुलासा हो गया।

24 गिरफ्तार, मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक कर्मचारी भी शामिल

अब तक की जांच में कुल 24 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इनमें पांच मेडिकल छात्र, कई नर्सिंग छात्र और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि नेटवर्क परीक्षा के दौरान पहचान सत्यापन और बायोमेट्रिक प्रक्रिया में गड़बड़ी कर असली अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर को परीक्षा दिलाने की कोशिश कर रहा था।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह का संचालन कौन कर रहा था और इसके तार बिहार के अलावा अन्य राज्यों से भी जुड़े हैं या नहीं।

MBBS छात्र ही बन गए Solver Gang का हिस्सा

मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि जिन छात्रों ने खुद NEET जैसी कठिन परीक्षा पास कर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हासिल किया, वही अब कथित तौर पर दूसरे अभ्यर्थियों के लिए सॉल्वर की भूमिका निभाते हुए पकड़े गए हैं। इसमें गया स्थित ANMMCH के मेडिकल छात्र अर्पित राज को इस नेटवर्क का प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार अर्पित का नाम पहले भी NEET पेपर लीक मामले की जांच के दौरान सामने आ चुका है। अब एक बार फिर उसका नाम आने के बाद पुराने रिकॉर्ड और केस फाइलों की भी समीक्षा की जा रही है।

AIIMS, BHU और दिल्ली तक पहुंची जांच

पुलिस जांच में कई प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े छात्रों के नाम सामने आए हैं। आरोप है कि BHU से जुड़ी एक नर्सिंग छात्रा दूसरे अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा देते हुए पकड़ी गई। इसी तरह AIIMS रायबरेली से जुड़े छात्र सौरभ झा को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र के एक मेडिकल कॉलेज से जुड़े मेडिकल इंटर्न अमन अग्रवाल का नाम भी जांच में सामने आया है। कुछ अन्य नर्सिंग संस्थानों के छात्रों को भी गिरफ्तार किया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि नेटवर्क केवल एक जिले तक सीमित नहीं था।

मेडिकल कॉलेजों की सावधानी भी नहीं रोक सकी छात्रों को

सूत्रों के मुताबिक NEET परीक्षा के दौरान कई मेडिकल कॉलेजों ने अपने छात्रों को परिसर से बाहर नहीं जाने की सलाह दी थी। छात्रों को व्यस्त रखने के लिए सेमिनार, अकादमिक गतिविधियां और क्विज कार्यक्रम भी आयोजित किए गए थे। इसके बावजूद कुछ छात्र कॉलेज से बाहर निकल गए। जांच में यह भी सामने आया कि एक आरोपी छात्र ने बीमारी का बहाना बनाकर कॉलेज छोड़ा और बाद में लखीसराय में पकड़ा गया। यह जानकारी जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण सबूत बन गई है।

बायोमेट्रिक सिस्टम पर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले ने परीक्षा केंद्रों पर लागू बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। चूंकि गिरफ्तार आरोपियों में बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी भी शामिल हैं, इसलिए जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं पहचान सत्यापन प्रक्रिया में जानबूझकर छेड़छाड़ तो नहीं की गई।
यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी मानी जाएगी।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों को NTA ने बताया फर्जी

इस बीच सोशल मीडिया पर NEET 2026 को लेकर कई वीडियो और दावे वायरल हुए हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने इन दावों को लेकर सफाई जारी की है।
NTA का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा एक वीडियो पूरी तरह फर्जी है और उसमें किए गए दावे भ्रामक हैं। एजेंसी के अनुसार NEET Re-Exam व्यापक सुरक्षा व्यवस्था, CCTV निगरानी, AI आधारित मॉनिटरिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन के बीच सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
NTA ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से बचें।

इस मामले में जांच अभी जारी

फिलहाल बिहार पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस रैकेट का संबंध किसी बड़े संगठित परीक्षा माफिया नेटवर्क से तो नहीं है।
इस मामले का खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब NEET परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से ही देशभर में चर्चा चल रही है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष आने वाले समय में परीक्षा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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