नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अगस्त और सितंबर का महीना कूटनीतिक गतिविधियों से बेहद व्यस्त रहने वाला है। इस दौरान वह दो महत्वपूर्ण विदेश यात्राएं करेंगे, जबकि भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी करेंगे। किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से लेकर नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करने तक, प्रधानमंत्री का कार्यक्रम लगातार अंतरराष्ट्रीय बैठकों से भरा रहेगा। इन दौरों के दौरान भारत की रणनीतिक साझेदारियों, वैश्विक सहयोग और कई अहम समझौतों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
SCO शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच चर्चा होगी। सम्मेलन के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकों की भी संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में देंगे संबोधन
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का 81वां सत्र 8 सितंबर 2026 से न्यूयॉर्क में शुरू होगा, जबकि उच्च स्तरीय आम बहस 22 सितंबर से आरंभ होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। हालांकि उनके भाषण की आधिकारिक तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। माना जा रहा है कि अपने संबोधन में वह आतंकवाद, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखेंगे।
नई दिल्ली में होगी BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी
भारत 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन की अध्यक्षता करेंगे। भारत ने अपनी अध्यक्षता की थीम “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखी है। सम्मेलन में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सतत विकास, वैश्विक आर्थिक सहयोग और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे।
ब्रिक्स में अब 11 सदस्य देश
ब्रिक्स समूह अब पांच नहीं बल्कि 11 देशों का संगठन बन चुका है। इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया भी शामिल हैं। विस्तारित सदस्यता के बाद यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में और अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है।
वैश्विक मंच पर अहम होगा भारत का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का आगामी विदेशी दौरा और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी मौजूदगी भारत की विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बैठकों के दौरान भारत व्यापार, निवेश, रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर अपने दृष्टिकोण को मजबूती से दुनिया के सामने रखेगा। विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनका संबोधन वैश्विक मुद्दों पर भारत की प्राथमिकताओं और भूमिका को स्पष्ट करेगा।