नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश के सामने विकसित भारत का विजन रखा। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ का जिक्र करते हुए भारत की सात प्रमुख शक्तियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में देश की क्षमता बढ़ाकर भारत को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाना होगा।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, ‘शक्ति की सप्तधारा’ में मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और खाद्य उत्पादन, टेक्नोलॉजी एवं इनोवेशन, गति शक्ति, रक्षा शक्ति, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी तथा भारत का सॉफ्ट पावर शामिल हैं।
पहली शक्ति- मैन्युफैक्चरिंग
पीएम मोदी ने मैन्युफैक्चरिंग को ‘शक्ति की सप्तधारा’ की पहली शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत को डिजाइन से लेकर उत्पादन तक पूरी वैल्यू चेन तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
भारत को लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के वैश्विक मानकों पर खरा उतरते हुए दुनिया के लिए एक भरोसेमंद ग्लोबल सप्लाई चेन पार्टनर बनना होगा। इससे देश में उत्पादन बढ़ाने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
दूसरी शक्ति- कृषि और खाद्य उत्पादन
‘शक्ति की सप्तधारा’ की दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य उत्पादन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार भारत के लिए खुल रहे हैं और मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय उत्पादों की पहुंच नए बाजारों तक बढ़ रही है।
उन्होंने भारतीय मसालों और मोटे अनाज यानी मिलेट्स को वैश्विक स्तर पर भारतीय ब्रांड के रूप में पहचान दिलाने पर जोर दिया।
तीसरी शक्ति- टेक्नोलॉजी और इनोवेशन
तीसरी शक्ति टेक्नोलॉजी और इनोवेशन है। पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है।
भारत को इन उभरती तकनीकों में अपनी क्षमता बढ़ाते हुए वैश्विक इनोवेशन हब बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया है। अब नेक्स्ट जेनरेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी में भी बड़ी छलांग लगाने की जरूरत है।
चौथी शक्ति- गति शक्ति
‘शक्ति की सप्तधारा’ में चौथी शक्ति गति शक्ति है। प्रधानमंत्री ने देश में तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी को आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने शहरों को हाई-स्पीड रेल से जोड़ने और पोर्ट-लेड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया। बेहतर कनेक्टिविटी से देश में कारोबार और आर्थिक गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।
पांचवीं शक्ति- रक्षा शक्ति
पांचवीं शक्ति रक्षा शक्ति है। पीएम मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत के लिए जरूरी है। भारत केवल दुनिया के लिए बड़ा बाजार बनकर नहीं रह सकता, बल्कि उसे रक्षा क्षेत्र में वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने नेक्स्ट जेनरेशन डिफेंस टेक्नोलॉजी विकसित करने और हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।
छठी शक्ति- ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी
छठी शक्ति ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी है। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में भारत की क्षमता बढ़ाने की बात कही।
वहीं ब्लू इकोनॉमी के तहत मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री तकनीक को महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया गया। इन क्षेत्रों को मजबूत करके रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
सातवीं शक्ति- भारत का सॉफ्ट पावर
‘शक्ति की सप्तधारा’ की सातवीं और अहम शक्ति भारत का सॉफ्ट पावर है। प्रधानमंत्री ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि योग ने दुनिया को भारत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि योग भारत की संस्कृति और विरासत को दुनिया तक पहुंचाने के साथ वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति विश्वास बढ़ाने का माध्यम भी बन रहा है।
विकसित भारत के लिए ‘सप्तधारा’ पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की क्षमताओं को पहले ‘सप्तसिंधु’ के रूप में जाना और समझा जाता था। अब विकसित भारत के निर्माण के लिए देश को ‘शक्ति की सप्तधारा’ के साथ आगे बढ़ना होगा।
मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्नोलॉजी, गति शक्ति, रक्षा, ग्रीन-ब्लू इकोनॉमी और सॉफ्ट पावर को मजबूत करना भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।