नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर सख्ती के लिए मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पेश कर दिया। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक पेश किया। प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक कराने या उसमें शामिल पाए जाने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, संसद के दोनों सदनों में विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
पेपर लीक पर सख्त सजा का प्रावधान
सरकार के नए विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। प्रस्तावित कानून के मुताबिक, यदि किसी परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आता है तो दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा। यदि किसी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी की भूमिका सामने आती है तो उसे आठ साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। वहीं, कंपनी के निदेशक या प्रबंधक दोषी पाए जाने पर उन्हें भी 10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले कोचिंग संस्थानों की संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान रखा गया है।
पीएम मोदी ने हाई-पावर टास्क फोर्स का किया ऐलान
विधेयक पेश होने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर परीक्षा सुधारों के लिए हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की। नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित छह सदस्यीय समिति परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के सुझाव देगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से ऐसे मामलों का जल्द निपटारा किया जाएगा।
INDIA ब्लॉक ने बनाई रणनीति
विधेयक पर संसद में चर्चा से पहले INDIA ब्लॉक की बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में हुई। बैठक में विपक्षी दलों ने विधेयक और परीक्षा सुधारों पर अपनी रणनीति तय की। विपक्ष का कहना है कि कानून के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार भी जरूरी हैं।
सरकार ने बताया छात्रों के हित में बड़ा कदम
केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा गठित हाई-पावर टास्क फोर्स छात्रों को न्याय दिलाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई कर रही है और कई आरोपी जेल में हैं। सरकार भविष्य में किसी भी परीक्षा में अनियमितता रोकने के लिए कठोर कानून और तकनीकी सुधार लागू करेगी।
विपक्ष ने कानून के साथ जवाबदेही की भी मांग उठाई
कांग्रेस सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि सरकार का फैसला देर से आया, लेकिन सही दिशा में है। उन्होंने कहा कि सबसे अहम सवाल यह है कि पेपर लीक की घटनाएं दोबारा न हों। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि कानून के साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि जांच कितने समय में पूरी होगी और दोबारा परीक्षा कब कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार घिरी
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान हुई कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सैकड़ों छात्रों को जेल भेजा गया है। उन्होंने पूछा कि अपने अधिकारों की मांग करना क्या अपराध है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ माजी ने कहा कि विपक्ष विधेयक पर गंभीर चर्चा चाहता है, लेकिन सरकार पर्याप्त बहस नहीं करा रही। उन्होंने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया।
सरकार ने सभी दलों से मांगा सहयोग
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनभावनाओं को समझते हैं और यही वजह है कि सरकार पेपर लीक पर सख्त कानून लेकर आई है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस विधेयक का समर्थन करें।