तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप मामले में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया, जिसमें उन्हें अपनी सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई से पहले सरेंडर करने का निर्देश दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी सरेंडर से छूट की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त को तेजपाल की सरेंडर से छूट की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने और सरेंडर सर्टिफिकेट दाखिल करने का समय दिया था। कोर्ट ने कहा था कि सर्टिफिकेट दाखिल होने के बाद ही उनकी अपील पर सुनवाई की जाएगी।
तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 2013 के मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। यह मामला नवंबर 2013 का है, जब तेजपाल पर गोवा में एक महिला सहकर्मी के साथ यौन अपराध करने का आरोप लगा था। मापुसा की निचली अदालत ने मई 2021 में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगी सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई
सरेंडर के बाद तेजपाल की सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील पर आगे सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। उनकी अपील में बॉम्बे हाईकोर्ट के दोषसिद्धि और 10 साल की सजा को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 22 सितंबर को सुनवाई कर सकता है।