UPI ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस व्यवस्था को ‘मोदी टैक्स’ बताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की है। इसी बीच कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा है कि कांग्रेस के पांच सांसदों ने UPI चार्ज व्यवस्था का समर्थन किया था।
दरअसल, संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट में UPI के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया गया था। इस समिति में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे।
गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि संसदीय समिति में सरकार के हालिया UPI चार्ज प्रस्ताव पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। उनके मुताबिक, जब वित्त विभाग के अधिकारी समिति के सदस्यों से मिले, तब उनके सामने UPI चार्ज को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं रखा गया था।
गोगोई ने कहा कि बैठक के दौरान MDR की जरूरत को लेकर सवाल जरूर उठाए गए थे, लेकिन उस समय सरकार के प्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस या संतोषजनक जवाब नहीं मिला था। उन्होंने मौजूदा UPI चार्ज व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
गोगोई ने आरोप लगाया कि नई UPI नीतियों से छोटे व्यापारियों, वेंडरों और उद्यमियों को नुकसान हो सकता है, जबकि बड़ी अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित UPI चार्ज वापस लेने की मांग की।
राहुल गांधी ने भी साधा था निशाना
इससे पहले राहुल गांधी ने बुधवार को UPI के नए MDR फ्रेमवर्क को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए सरकार की नीति पर सवाल उठाए और इसे ‘मोदी टैक्स’ बताया।
2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा लेन-देन पर 0.4% MDR
केंद्र सरकार ने 2,000 रुपये से अधिक के कुछ चुनिंदा मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR की व्यवस्था का ऐलान किया है। सरकार के मुताबिक यह चार्ज सभी UPI लेन-देन पर लागू नहीं होगा। इस व्यवस्था को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच राजनीतिक बहस जारी है।