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वाराणसी में विश्व गौरैया दिवस पर मिसाल बना प्राथमिक विद्यालय, लौट रही गौरैया

वाराणसी में विश्व गौरैया दिवस के मौके पर शहर के प्राथमिक विद्यालय चंद्रावती से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल सामने आई है। बेसिक शिक्षा विभाग के इस स्कूल में पिछले 5-6 वर्षों से गौरैया संरक्षण को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है, जिसका असर अब जमीन पर दिखने लगा है।

लगातार प्रयासों से लौटी गौरैया
विद्यालय की शिक्षिका डॉ. सुमन कुमारी के निरंतर प्रयासों के चलते अब स्कूल परिसर में गौरैयों की संख्या बढ़ने लगी है। पहले जहां यह पक्षी नजर नहीं आते थे, वहीं अब वे यहां घोंसले बना रहे हैं और नियमित रूप से दिखाई दे रहे हैं।

भोजन और पानी की नियमित व्यवस्था
विद्यालय परिसर में गौरैयों के लिए चावल के दाने डाले जाते हैं और मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाता है। खास बात यह है कि इन बर्तनों को प्रतिदिन भरा जाता है, जिससे पक्षियों को लगातार भोजन और पानी मिल सके।

बच्चों को भी बनाया जा रहा जागरूक
इस पहल के माध्यम से स्कूल के बच्चों को भी पर्यावरण संरक्षण और पक्षियों के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। बच्चे खुद भी इस अभियान में हिस्सा लेते हैं और पक्षियों के प्रति संवेदनशील बन रहे हैं।

समाज के लिए प्रेरणादायक पहल
डॉ. सुमन कुमारी का कहना है कि कई वर्षों की मेहनत के बाद अब गौरैयों की वापसी देखने को मिल रही है, जो इस अभियान की सफलता का प्रमाण है। विद्यालय की यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत संदेश देती है और समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है।