पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है। यह फैसला चुनाव से ठीक पहले लिया गया, जिससे राज्य की सियासत में हलचल बढ़ गई है।
AIMIM ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि हुमायूं कबीर के हालिया बयानों से यह स्पष्ट होता है कि वे ऐसे विचारों से जुड़ना नहीं चाहते जो किसी भी समुदाय, खासकर मुसलमानों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों। पार्टी ने साफ किया कि वह ऐसे किसी भी बयान या सोच से दूरी बनाए रखेगी, जिससे समाज में गलत संदेश जाए।
पार्टी ने अपने बयान में यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के मुसलमान लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हुए हैं। दशकों तक खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली सरकारों के बावजूद इस समुदाय के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ है। AIMIM का कहना है कि उसकी राजनीति का मुख्य उद्देश्य हाशिए पर खड़े लोगों को एक स्वतंत्र और मजबूत राजनीतिक आवाज देना है। इसी वजह से पार्टी अब बंगाल में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर चुकी है और आगे किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 9 अप्रैल को एक कथित वीडियो जारी किया। इस वीडियो में हुमायूं कबीर पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिसमें वे कथित तौर पर बड़ी रकम और धार्मिक मुद्दों को लेकर आपत्तिजनक बातें करते नजर आए। हालांकि, हुमायूं कबीर ने इस वीडियो को पूरी तरह से फर्जी और AI से तैयार किया गया बताया है।
गौरतलब है कि इससे पहले 25 मार्च को हुमायूं कबीर ने AIMIM के साथ गठबंधन की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने ओवैसी को अपना “बड़ा भाई” बताते हुए कहा था कि यह गठबंधन पश्चिम बंगाल में एक मजबूत तीसरा विकल्प बनेगा और उन लोगों की आवाज उठाएगा जो मुख्यधारा की राजनीति से खुद को अलग महसूस करते हैं।
लेकिन अब गठबंधन टूटने के बाद राज्य की राजनीति में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। आने वाले चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है, क्योंकि AIMIM अब अकेले मैदान में उतरेगी और तीसरे मोर्चे की राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश करेगी।






