डेटा के मुताबिक, डायबिटीज के मरीजों में हाथ और पैरों में संक्रमण (इन्फेक्शन) होने की आशंका काफी अधिक होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब शरीर में ब्लड शुगर का स्तर लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है, तो इसका सीधा असर नसों और रक्त संचार पर पड़ता है।
हाई ब्लड शुगर की वजह से पैरों और हाथों की नसें कमजोर होने लगती हैं, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। इसके कारण अंगों में सुन्नपन आ जाता है, जिससे चोट लगने या कटने पर मरीज को समय पर दर्द महसूस नहीं होता है। यही वजह है कि छोटे-छोटे घाव भी बड़े संक्रमण का रूप ले लेते हैं।
इसके अलावा, मधुमेह के मरीजों में ब्लड सर्कुलेशन यानी रक्त का संचार भी धीमा हो जाता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) प्रभावित होती है और शरीर बैक्टीरिया व फंगस से उतनी तेजी से मुकाबला नहीं कर पाता है। यही कारण है कि डायबिटीज रोगियों को घाव भरने में अधिक समय लगता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि डायबिटीज के मरीजों को अपने पैरों और हाथों की नियमित रूप से जांच करनी चाहिए। त्वचा को सूखा और साफ रखना बेहद जरूरी है। जरा सी भी लापरवाही या छोटा घाव गंभीर समस्या बन सकता है, इसलिए समय पर डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।