नई दिल्ली: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान लंबे समय तक अनशन पर रहने के बाद उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर अपनी सेहत और आगे की योजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घर लौटने से पहले वह महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाएंगे।
राजघाट जाकर बापू को देंगे श्रद्धांजलि
वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा, “सभी को नमस्कार, आखिर वह दिन आ गया जब मैं इस अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहा हूं। अब मैं काफी बेहतर महसूस कर रहा हूं, खाना खा रहा हूं और शरीर में ताकत लौट रही है। यहां से निकलने के बाद और घर जाने से पहले मैं राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करूंगा। जब मैं स्विट्जरलैंड से लौटकर इस आंदोलन की शुरुआत करने आया था, तब भी सबसे पहले राजघाट जाकर श्रद्धांजलि दी थी और उसके बाद जंतर-मंतर पहुंचा था।”
उन्होंने आंदोलन में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “आप सभी ने आवाज से आवाज मिलाकर इस आंदोलन को सफल बनाया। आप सभी को दिल से सलाम। जय हिंद।”
26 दिनों तक रहे अनशन पर
सोनम वांगचुक 28 जून को छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे और इसके बाद लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे। स्वास्थ्य बिगड़ने पर 18 जुलाई को उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस दौरान वांगचुक ने आरोप लगाया था कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उन्हें हिरासत में रखा गया हो।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मेदांता में हुआ इलाज
बाद में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया, जहां उनका इलाज चला। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
36 दिन बाद खत्म हुआ आंदोलन
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन चला। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त हो गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया।