भारत भाग्य विधाता शो का प्रोमो बैनर, जिसमें शो के एंकर Vivek Pathak की तस्वीर दिखाई गई है। इसका प्रसारण सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे Bharat Update पर होता है।

बच्चे की हर जिद पूरी करना पड़ सकता है भारी, जानें 5 पैरेंटिंग टिप्स

पैरेंटिंग टिप्स

बच्चों की छोटी-छोटी जिद पूरी करना माता-पिता को अक्सर आसान रास्ता लगता है। बच्चा रोया या गुस्सा किया और उसकी पसंद की चीज दिला दी। लेकिन अगर हर बार उसकी मांग तुरंत पूरी कर दी जाए, तो धीरे-धीरे बच्चे को जिद करके अपनी बात मनवाने की आदत लग सकती है। खासकर महंगे मोबाइल, गैजेट और ब्रांडेड चीजों को लेकर बच्चों को सही तरीके से समझाना बेहद जरूरी है। ऐसे में माता-पिता के लिए सही पैरेंटिंग टिप्स अपनाना जरूरी है, ताकि बच्चों को उनकी जरूरत और इच्छा के बीच का फर्क समझाया जा सके।

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने इस मुद्दे को गंभीर बना दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, iPhone की मांग को लेकर एक युवक पहाड़ी के किनारे पहुंच गया था। परिवार के लोग उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान वह खाई में गिर गया। उसे बचाने की कोशिश में पिता भी नीचे गिर गए और इसके बाद मां ने भी छलांग लगा दी। इस हादसे में तीन लोगों की जान चली गई।

यह घटना बेहद दुखद है। हालांकि, किसी भी ऐसी घटना को सिर्फ बच्चे की जिद से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि इसके पीछे कई परिस्थितियां हो सकती हैं। लेकिन यह मामला माता-पिता को बच्चों की परवरिश और उनकी भावनाओं को समझने के तरीके पर जरूर सोचने का मौका देता है।

बच्चों को बचपन से सिखाएं ये 5 बातें

1. ‘ना’ सुनना सिखाएं

बच्चे को समझाएं कि हर बार उसकी पसंद की चीज मिलना जरूरी नहीं है। किसी मांग के पूरी न होने पर नाराज होना सामान्य है, लेकिन चिल्लाना, धमकी देना या किसी को नुकसान पहुंचाना सही नहीं है। बच्चों को धीरे-धीरे निराशा को संभालना सिखाएं।

2. हर जिद तुरंत पूरी न करें

बच्चा रोए या गुस्सा करे और उसकी मांग तुरंत पूरी कर दी जाए, तो उसे लग सकता है कि जिद करने से उसकी बात मानी जाएगी। इसलिए हर मांग पर तुरंत हां कहने के बजाय बच्चे को प्यार से समझाएं कि क्या संभव है और क्या नहीं। जरूरत पड़ने पर कोई दूसरा विकल्प भी दें।

3. जरूरत और इच्छा में फर्क समझाएं

बच्चों को बताएं कि हर पसंद की चीज जरूरत नहीं होती। नया स्मार्टफोन, महंगे कपड़े या गेमिंग डिवाइस पसंद हो सकते हैं, लेकिन हर बार इन्हें खरीदना जरूरी नहीं है। परिवार की जरूरतों और बजट के बारे में बच्चे को उसकी उम्र के हिसाब से सरल भाषा में समझाएं।

4. पैसों की अहमियत बताएं

बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि पैसे कमाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है। हर चीज तुरंत खरीदना संभव नहीं होता। उन्हें छोटी-छोटी बचत करने की आदत भी डाल सकते हैं। इससे बच्चे को पैसे की कीमत और खर्च की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

5. बच्चों से खुलकर बातचीत करें

बच्चों से केवल उनकी गलतियों के समय बात न करें। रोज उनकी बातें सुनें और उनकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। घर के छोटे-छोटे कामों की जिम्मेदारी भी दें। इससे उनमें जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ सकती है।

बच्चे के व्यवहार को नजरअंदाज न करें

अगर बच्चा लगातार बहुत ज्यादा गुस्सा करता है, बेहद आक्रामक व्यवहार करता है या खुद को या किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने की बात करता है, तो इसे केवल जिद समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में माता-पिता को किसी योग्य काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

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