भारत भाग्य विधाता शो का प्रोमो बैनर, जिसमें शो के एंकर Vivek Pathak की तस्वीर दिखाई गई है। इसका प्रसारण सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे Bharat Update पर होता है।

Toxic Movie Review: यश का धांसू स्वैग और खूनी एक्शन, लेकिन कमजोर कहानी ने बिगाड़ा पूरा खेल

KGF 2 के करीब चार साल बाद रॉकिंग स्टार यश बड़े पर्दे पर लौट आए हैं। उनकी मच अवेटेड फिल्म ‘टॉक्सिक’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है।
Toxic Movie Review

Toxic Movie Review: KGF 2 के करीब चार साल बाद रॉकिंग स्टार यश बड़े पर्दे पर लौट आए हैं। उनकी मच अवेटेड फिल्म टॉक्सिक सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म में यश का जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस, स्टाइलिश स्वैग और खूनी एक्शन खूब देखने को मिलता है। कई सीन्स ऐसे हैं, जहां यश की एंट्री और उनके डायलॉग पर थिएटर तालियों से गूंज सकता है।

लेकिन 3 घंटे 14 मिनट लंबी यह फिल्म हर मोर्चे पर उतनी मजबूत नहीं है। शानदार विजुअल्स और दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद कहानी कई जगह उलझती नजर आती है। ड्रग्स सिंडिकेट से शुरू होने वाली कहानी आखिरकार परिवार, रिश्तों और गिल्ट तक पहुंचती है। ऐसे में सवाल है कि क्या ‘टॉक्सिक’ यश के स्टारडम और KGF वाली उम्मीदों पर खरी उतरती है? आइए जानते हैं।

कैसी है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी 1940 के दशक के गोवा की पृष्ठभूमि में सेट है। यश ने फिल्म में राया का किरदार निभाया है, जबकि नयनतारा उनकी बहन गंगा के रोल में नजर आती हैं। माता-पिता के गुजरने के बाद गंगा अपने भाई राया की परवरिश करती है और चाहती है कि उसका भाई पूरे गोवा पर अपना दबदबा कायम करे।

राया ड्रग्स के एक बड़े सिंडिकेट से जुड़ा हुआ है। इसी दौरान उसकी जिंदगी में कई किरदारों की एंट्री होती है। रेबेका और नादिया के साथ उसके रिश्ते कहानी को अलग-अलग मोड़ देते हैं।

समस्या यह है कि फिल्म एक साथ कई ट्रैक पर चलने की कोशिश करती है। शुरुआत में कहानी ड्रग्स माफिया और अपराध की दुनिया पर केंद्रित नजर आती है, लेकिन क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते इसका फोकस परिवार, पिता-पुत्र के रिश्ते और अपराधबोध पर चला जाता है।

कई जगह ऐसा महसूस होता है कि फिल्म को एक साथ बहुत कुछ कहने की कोशिश में इसकी मूल कहानी पीछे छूट गई है।

यश का स्वैग है फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

यश के फैंस के लिए ‘टॉक्सिक’ किसी ट्रीट से कम नहीं है। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी ही फिल्म को अलग लेवल पर ले जाती है। उनका अंदाज, बॉडी लैंग्वेज, वन-लाइनर्स और एक्शन सीन्स खूब प्रभावित करते हैं।

सिगरेट जलाने से लेकर दुश्मनों की धुनाई करने तक यश का हर अंदाज स्टाइलिश है। उनके डायलॉग पर थिएटर में सीटियां और तालियां बजने की पूरी संभावना है।

फिल्म में उनका एक डायलॉग है, “वॉयलेंस मेरी भाषा है, एक ऐसी यूनिवर्सल लैंग्वेज जो हर किसी की समझ में आती है।” यह लाइन फिल्म में उनके किरदार की पूरी झलक देती है।

नयनतारा ने भी छोड़ी अपनी छाप

यश जैसे बड़े स्टार के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराना आसान नहीं होता, लेकिन नयनतारा इसमें कामयाब रहती हैं। गंगा के किरदार में वह मजबूत और प्रभावशाली नजर आती हैं।

यश और नयनतारा की भाई-बहन वाली बॉन्डिंग फिल्म की खासियतों में शामिल है। दोनों के बीच इमोशनल सीन्स अच्छे लगते हैं और नयनतारा को एक्शन सीक्वेंस में भी दमदार स्पेस मिला है।

कियारा आडवाणी की केमिस्ट्री असरदार

कियारा आडवाणी और यश के बीच रोमांटिक केमिस्ट्री भी फिल्म में देखने को मिलती है। दोनों के बीच की बॉन्डिंग और इमोशनल कनेक्शन कई जगह कहानी को संभालने का काम करते हैं।

वहीं हुमा कुरैशी अपने किरदार में दमदार नजर आती हैं। तारा सुतारिया भी अपने हिस्से के सीन्स में प्रभावित करती हैं।

फिल्म की टैगलाइन ‘A Fairy Tale for Grown-Ups’ है, इसलिए इसमें बोल्ड और इंटीमेट सीन्स भी देखने को मिलते हैं। हालांकि ये सीन्स कहानी में जबरन जोड़े गए महसूस नहीं होते।

म्यूजिक ने किया निराश

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और ज्यादातर गाने इसकी लंबी अवधि को और महसूस कराते हैं। कई जगह म्यूजिक फिल्म की रफ्तार बढ़ाने के बजाय उसे धीमा कर देता है।

हालांकि ‘तबाही’ ऐसा ट्रैक है जो दर्शकों की जुबान पर आसानी से चढ़ जाता है और रिलीज से पहले ही इसकी अच्छी चर्चा हो चुकी है।

डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले

फिल्म की कहानी गीतू मोहनदास और यश ने मिलकर लिखी है। यश प्रोडक्शन में भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म का सबसे कमजोर पक्ष इसका स्क्रीनप्ले नजर आता है।

कहानी में एक साथ कई पैरेलल ट्रैक चलाने की कोशिश की गई है। नतीजा यह होता है कि कई जगह कहानी बिखरी हुई लगती है। एक ट्रैक से शुरू होकर फिल्म अचानक दूसरे ट्रैक पर चली जाती है।

फिल्म की लंबाई भी इसकी बड़ी कमजोरी है। अगर स्क्रीनप्ले को थोड़ा टाइट किया जाता और गैरजरूरी हिस्सों को कम किया जाता तो कहानी कहीं ज्यादा प्रभावी हो सकती थी।

राया के बचपन और उसके दर्द से जुड़े हिस्से इमोशनल होने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर जगह वह इमोशन दर्शकों तक उतनी गहराई से नहीं पहुंच पाता। क्लाइमैक्स आते-आते कुछ दर्शकों को यह महसूस हो सकता है कि फिल्म जरूरत से ज्यादा लंबी हो गई है।

एक्शन और विजुअल्स शानदार

जहां कहानी कमजोर पड़ती है, वहीं फिल्म का एक्शन और विजुअल ट्रीटमेंट मजबूत नजर आता है। सिनेमैटोग्राफी शानदार है और बड़े पर्दे पर एक्शन सीक्वेंस का स्केल साफ दिखाई देता है।

फिल्म में एक्शन पर जमकर पैसा खर्च किया गया है और यह स्क्रीन पर नजर भी आता है। यश के फैंस के लिए ये सीन्स फिल्म की सबसे बड़ी वजह हो सकते हैं।

देखें या नहीं?

अगर आप यश के कट्टर फैन हैं और बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन, धांसू एंट्री और मास मोमेंट्स देखना पसंद करते हैं, तो ‘टॉक्सिक’ आपको पसंद आ सकती है।

लेकिन अगर आप एक कसी हुई, लॉजिकल और धारदार कहानी की उम्मीद लेकर थिएटर जा रहे हैं, तो फिल्म आपको निराश कर सकती है। शानदार स्टारडम और जबरदस्त एक्शन के बावजूद कमजोर और बिखरी कहानी इसका सबसे बड़ा माइनस पॉइंट है।

फाइनल वर्डिक्ट: यश का स्वैग और एक्शन पैसा वसूल है, लेकिन कहानी कई जगह ‘टॉक्सिक’ हो जाती है।

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