चंडीगढ़: पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने अध्यक्ष पद पर जीत दर्ज की है। ABVP के उम्मीदवार अंकित बिढान ने अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया। इस जीत के बाद कैंपस की छात्र राजनीति में ABVP का प्रभाव एक बार फिर चर्चा में है। खास बात यह है कि यह चुनाव ऐसे समय हुआ, जब जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रों के राजनीतिक रुख को लेकर भी काफी चर्चा थी।
पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को केवल विश्वविद्यालय की राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा है। चुनाव के दौरान राष्ट्रीय मुद्दों के साथ-साथ छात्रों से जुड़े स्थानीय सवाल भी प्रमुखता से उठे।
अध्यक्ष पद पर ABVP की जीत
छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर ABVP उम्मीदवार अंकित बिढान की जीत संगठन के लिए अहम मानी जा रही है। प्रचार अभियान के दौरान छात्र संगठनों के बीच तीखा मुकाबला देखने को मिला। विपक्षी संगठनों ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन सहित कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर ABVP पर सवाल उठाए।
हालांकि, चुनावी बहस और विरोध के बावजूद अंकित बिढान अध्यक्ष पद पर जीत हासिल करने में कामयाब रहे। इस नतीजे ने कैंपस की छात्र राजनीति में ABVP की स्थिति को मजबूत किया है।
Gen Z छात्रों के वोट पर क्यों थी नजर?
पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव इस बार इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि बड़ी संख्या में युवा और Gen Z छात्र मतदान प्रक्रिया का हिस्सा थे। जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद युवाओं के राजनीतिक रुझान को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे थे।
ऐसे में चुनाव के नतीजे यह समझने के लिहाज से भी देखे जा रहे हैं कि विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवा किन मुद्दों को महत्व दे रहे हैं। हालांकि, किसी एक छात्रसंघ चुनाव के नतीजे से पूरे युवा वर्ग की राजनीतिक सोच का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
पंजाब के 23 जिलों से आते हैं छात्र
पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति का दायरा काफी बड़ा है। यहां पंजाब के सभी 23 जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों से भी छात्र पढ़ने आते हैं। यही वजह है कि यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव को पंजाब के युवा वर्ग के राजनीतिक मूड को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कैंपस में सक्रिय रहने वाले छात्र आगे चलकर सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में छात्र संगठनों के लिए विश्वविद्यालय चुनाव केवल एक कैंपस चुनाव नहीं, बल्कि संगठन के भविष्य के विस्तार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होते हैं।
सिर्फ राष्ट्रीय मुद्दे नहीं, छात्रों की समस्याएं भी बनीं चुनावी मुद्दा
चुनावी प्रचार के दौरान राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों के अलावा छात्रों की रोजमर्रा की समस्याएं भी चर्चा में रहीं। हॉस्टल की सुविधाएं, फीस में बढ़ोतरी, रिसर्च स्कॉलर्स की समस्याएं, कैंपस में सुरक्षा और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों ने भी चुनावी बहस को प्रभावित किया।
इससे साफ है कि छात्र राजनीति में बड़े राजनीतिक मुद्दों के साथ स्थानीय समस्याओं की भूमिका भी अहम बनी हुई है। उम्मीदवारों और छात्र संगठनों ने इन्हीं मुद्दों के जरिए छात्रों तक पहुंच बनाने की कोशिश की।
निर्दलीय उम्मीदवारों ने बढ़ाई चुनौती
इस चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों और अलग-अलग बागी गुटों की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया। ऐसे चुनाव में वोटों का बंटवारा प्रमुख छात्र संगठनों के समीकरण को प्रभावित कर सकता है।
इसके बावजूद अध्यक्ष पद पर ABVP ने जीत हासिल की। अंकित बिढान की जीत के बाद संगठन के समर्थकों में उत्साह है और इसे कैंपस में अपनी पकड़ मजबूत करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या 2027 विधानसभा चुनाव से है कोई कनेक्शन?
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू होना स्वाभाविक है। राजनीतिक दलों के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में युवाओं का रुख हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।
हालांकि, पंजाब यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव को सीधे 2027 विधानसभा चुनाव का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे, मतदाता और राजनीतिक समीकरण विधानसभा चुनाव से काफी अलग होते हैं। अगले विधानसभा चुनाव तक कई नए मुद्दे सामने आ सकते हैं और युवाओं की प्राथमिकताएं भी बदल सकती हैं।
फिलहाल इतना जरूर है कि पंजाब यूनिवर्सिटी में ABVP की जीत ने छात्र राजनीति में संगठन की स्थिति को मजबूत किया है। अंकित बिढान के अध्यक्ष बनने के बाद अब नजर इस बात पर होगी कि नई छात्रसंघ टीम कैंपस से जुड़े मुद्दों और छात्रों की समस्याओं को किस तरह उठाती है।