भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों में नई छलांग, यूरेनियम आपूर्ति से UPI तक 11 समझौतों और 5 बड़े एलानों पर मुहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों को नई दिशा देने वाले कई अहम फैसले हुए.
भारत-उज्बेकिस्तान
भारत-उज्बेकिस्तान रिश्तों में नई छलांग

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्तों को नई दिशा देने वाले कई अहम फैसले हुए हैं। दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के बीच हुई बातचीत के बाद दोनों देशों ने 11 समझौतों और MoU पर हस्ताक्षर किए, जबकि पांच प्रमुख घोषणाएं भी की गईं।

इन फैसलों का असर सिर्फ कूटनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहने वाला है। ऊर्जा सुरक्षा, रणनीतिक खनिज, डिजिटल भुगतान, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक विरासत जैसे कई क्षेत्रों में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग बढ़ेगा। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया है।

भारत को मिलेगा उज्बेकिस्तान से यूरेनियम

यात्रा के दौरान सबसे अहम फैसलों में से एक यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर हुआ है। दोनों देशों ने यूरेनियम सप्लाई के लिए दीर्घकालिक व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए यह समझौता रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके साथ ही महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों और भूविज्ञान के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इससे भारत को भविष्य की ऊर्जा और तकनीकी जरूरतों के लिए जरूरी रणनीतिक संसाधनों की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।

अब उज्बेकिस्तान में चलेगा UPI

भारत की डिजिटल पेमेंट व्यवस्था UPI को उज्बेकिस्तान के UZQR सिस्टम से जोड़ने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया गया है। इसके तहत भारतीय UPI ऐप के जरिए उज्बेकिस्तान में व्यापारियों के UZQR को स्कैन करके भुगतान करने की सुविधा विकसित की जाएगी।

इससे भारतीय पर्यटकों और कारोबारियों के लिए उज्बेकिस्तान में डिजिटल भुगतान आसान होने की उम्मीद है। साथ ही दोनों देशों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

किन क्षेत्रों में हुए 11 समझौते?

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच हुए समझौतों में कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। इनमें—

  • 2026-30 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम
  • पर्यटन सहयोग
  • आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा
  • पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन
  • उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान
  • आर्थिक और वित्तीय संवाद
  • राष्ट्रीय अभिलेखागार के बीच सहयोग
  • राजनयिक प्रशिक्षण
  • महत्वपूर्ण खनिज और भूविज्ञान
  • बौद्ध विरासत संरक्षण
  • डिजिटल भुगतान सहयोग

जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

बौद्ध विरासत को संरक्षित करने पर भी समझौता

भारत और उज्बेकिस्तान ने तेरमेज स्थित फयाज तेपा और कारा तेपा बौद्ध स्थलों के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए Letter of Intent पर भी सहमति जताई है। इन ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण के जरिए दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।

अराल सागर के लिए भारत देगा 10 लाख डॉलर

उज्बेकिस्तान के पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी भारत ने सहयोग का ऐलान किया है। भारत अराल सागर क्षेत्र में वनीकरण के लिए 10 लाख डॉलर की सहायता देगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र में हरित क्षेत्र बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

हिंदी और संस्कृत को भी मिलेगा बढ़ावा

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के सांस्कृतिक संबंधों पर भी विशेष जोर दिया गया। हिंदी के अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए 100 लाल बहादुर शास्त्री स्कॉलरशिप देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी में ICCR संस्कृत चेयर स्थापित करने का फैसला भी हुआ है।

यह फैसला दोनों देशों के बीच शिक्षा और भारतीय भाषाओं के प्रति बढ़ती रुचि को और मजबूत कर सकता है।

गुजरात और समरकंद के बीच बढ़ेगी साझेदारी

भारत के गुजरात और उज्बेकिस्तान के समरकंद क्षेत्र के बीच पार्टनरशिप संबंध स्थापित करने को लेकर भी समझौता हुआ है। इसके जरिए दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार, निवेश, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने की कोशिश होगी।

2030 तक 5 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार 1 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है। अब दोनों देशों ने इसे 2030 तक 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बाजार तक पहुंच, कनेक्टिविटी, बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा में रणनीतिक साझेदारी का विस्तार, यूरेनियम और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग तथा UPI-UZQR कनेक्टिविटी सबसे बड़े फैसलों के तौर पर सामने आए हैं। इनके जरिए भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते कूटनीतिक स्तर से आगे बढ़कर ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग की नई दिशा में जाते दिख रहे हैं।

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