नई दिल्ली: जुलाई में हुए छात्र आंदोलन को लेकर दर्ज की गई एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दिल्ली समेत देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों में राहत दी है।
दिल्ली के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र पुलिस की ओर से भी आंदोलन से संबंधित एफआईआर को खत्म करने का अनुरोध किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने इन राज्यों की मांग को स्वीकार कर लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अन्य राज्यों में दर्ज मामलों के लिए भी इसी तरह का आदेश देने की अपील की। कोर्ट ने कहा कि बाकी एफआईआर में भी फिलहाल कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।
दिल्ली में दर्ज हुई थीं 13 एफआईआर
जुलाई में दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान 20 से 25 जुलाई के बीच पुलिस ने कुल 13 एफआईआर दर्ज की थीं। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन सभी मामलों को निरस्त करने का अनुरोध किया था।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने साथ ही एक नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। यह मामला भीड़ में शामिल ऐसे 2,873 लोगों के खिलाफ दर्ज किया जाना है, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को इस संबंध में नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दे दी।
सरकार ने छात्रों से किए थे कई वादे
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने आंदोलन के दौरान छात्रों से कई आश्वासन दिए थे। इनमें दर्ज मुकदमों को वापस लेना, भविष्य में इन घटनाओं को लेकर एफआईआर दर्ज नहीं करना और आंदोलन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने जैसे वादे शामिल हैं।
सरकार ने अदालत से इन वादों को पूरा करने के लिए समय देने का अनुरोध किया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि मुआवजे को लेकर अभी कोई अंतिम आदेश न दिया जाए, क्योंकि इससे भविष्य की अन्य परीक्षाओं और मामलों के लिए एक मिसाल बन सकती है। उन्होंने अदालत से सरकार के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेने और करीब तीन महीने का समय देने की मांग की।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि परीक्षा से जुड़े तनाव के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए एक फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है और जल्द ही इस संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
अदालत ने सरकार के इस अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया और उसके आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया।
सौरभ दास ने कोर्ट को दिया धन्यवाद
सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास ने हाथ जोड़कर सुप्रीम कोर्ट के जजों का धन्यवाद किया। मुख्य न्यायाधीश ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
सौरभ दास ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इस फैसले के बाद 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च को वापस लिया जा रहा है। अदालत ने उनके इस बयान को भी रिकॉर्ड पर लेने का निर्देश दिया।
अनुच्छेद 142 के तहत मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला जुलाई के छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। अदालत ने अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए संबंधित एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई है। हालांकि, गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ अलग एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दिए जाने से यह भी स्पष्ट है कि अदालत ने पूरे मामले में सभी आरोपों को एक समान नहीं माना है।