INDI अलायंस को विपक्ष के ही सांसद ने दिखाया आईना! शशि थरूर की खरी-खरी, Gen-Z को लेकर दी बड़ी नसीहत

देश की राजनीति में Gen-Z यानी नई पीढ़ी की बदलती राजनीतिक सोच को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों को भी आत्ममंथन करने की सलाह दी है।
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INDI अलायंस पर शशि थरूर की खरी-खरी

नई दिल्ली: देश की राजनीति में Gen-Z यानी नई पीढ़ी की बदलती राजनीतिक सोच को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों को भी आत्ममंथन करने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर की राजनीति को समझने के लिए पुराने राजनीतिक समीकरणों से आगे देखने की जरूरत है। थरूर का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह विपक्ष के भीतर से ही आया है।

शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लेख साझा किया। इसमें उन्होंने भारतीय राजनीति में Gen-Z के उभार, बांकीपुर और दतिया के उपचुनावों के संकेतों और बीजेपी की चुनावी संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हालिया घटनाओं से सिर्फ सत्तारूढ़ दल ही नहीं, बल्कि विपक्ष को भी कई महत्वपूर्ण सबक लेने की जरूरत है।

‘पुराने समीकरणों से आगे बढ़ना होगा’

थरूर के मुताबिक, भारतीय राजनीति में युवा पीढ़ी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए सिर्फ पारंपरिक जातीय और सामाजिक समीकरणों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। युवाओं के बदलते मुद्दों, उनकी अपेक्षाओं और राजनीतिक सोच को समझना जरूरी है।

उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि जब विश्लेषक भारतीय राजनीति में Gen-Z के विद्रोह, बांकीपुर और दतिया के उपचुनावों के संकेतों और बीजेपी की बदलती चुनावी स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं, तब बाकी राजनीतिक दलों को भी हाल की घटनाओं से मिलने वाले सबक पर विचार करना चाहिए।

‘आंदोलन पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों से नहीं निकला’

शशि थरूर ने अपने लेख में उस आंदोलन का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने पारंपरिक जातीय या सांप्रदायिक एकजुटता से अलग बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी स्थापित राजनीतिक रणनीतिकार की योजना का परिणाम नहीं था, बल्कि ऐसी घटना से पैदा हुआ जिसने लोगों की भावनाओं को प्रभावित किया।

थरूर का यह बयान इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि उन्होंने युवा आंदोलनों को केवल पारंपरिक राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय उनके पीछे मौजूद भावनाओं और तत्काल मुद्दों को समझने की जरूरत पर जोर दिया।

विपक्ष के लिए क्यों अहम है थरूर का संदेश?

थरूर के बयान को विपक्ष के लिए एक तरह की नसीहत के तौर पर देखा जा रहा है। उनका संकेत है कि अगर विपक्ष को आने वाले चुनावों में मजबूत राजनीतिक विकल्प के तौर पर खुद को पेश करना है तो उसे नई पीढ़ी के सवालों को समझना होगा।

आज का युवा रोजगार, शिक्षा, तकनीक, अवसर और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर मुखर है। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए यह समझना जरूरी हो गया है कि युवा मतदाताओं को केवल पुराने राजनीतिक नारों या पारंपरिक समीकरणों के जरिए प्रभावित करना आसान नहीं होगा।

क्या बदल रही है युवा वोटरों की राजनीति?

भारत में युवा मतदाताओं की बड़ी आबादी चुनावी राजनीति को लगातार प्रभावित कर रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने युवाओं को अपनी राय रखने और राजनीतिक मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने का नया माध्यम दिया है।

यही वजह है कि राजनीतिक दल भी Gen-Z और युवा वोटरों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के दिनों में राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने भी युवा प्रदर्शनकारियों और उनसे जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाई है।

आने वाले चुनावों पर पड़ेगा असर?

शशि थरूर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब आने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या युवा मतदाताओं की बदलती सोच विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों की चुनावी रणनीति में कोई बड़ा बदलाव लाती है।

फिलहाल, थरूर के बयान ने विपक्ष के भीतर ही एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या राजनीति अब पुराने समीकरणों से आगे बढ़कर नई पीढ़ी के मुद्दों के हिसाब से खुद को बदलने के लिए तैयार है?

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