AIIMS Tanvi Death Case: दिल्ली के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में 16 साल की तन्वी की मौत ने अस्पताल में इलाज और सर्जरी की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजस्थान के कोटा की रहने वाली तन्वी ने मंगलवार, 1 सितंबर की सुबह दम तोड़ दिया। परिवार का दावा है कि वह करीब 13 साल से दिल की सर्जरी का इंतजार कर रही थी। मामले के सामने आने के बाद AIIMS प्रशासन ने अब उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
तन्वी को जन्म से ही दिल की गंभीर बीमारी थी। परिवार के मुताबिक, वे लंबे समय तक इलाज और सर्जरी की उम्मीद में AIIMS के चक्कर लगाते रहे, लेकिन सर्जरी नहीं हो सकी। वहीं AIIMS ने अपने आधिकारिक बयान में बताया है कि मेडिकल जांच के बाद उसकी बीमारी की जटिलता को देखते हुए 2017 में सर्जरी न करने का निर्णय लिया गया था।
पिता ने कहा- मुझे न्याय चाहिए
तन्वी के पिता मुकेश कुमार ने अपनी बेटी की मौत के बाद न्याय की मांग की है। उनका कहना है पिता मुकेश कुमार ने कहा, “मैं पिछले 14 साल से दिल्ली में भाग-दौड़ कर रहा हूं. मुझे न्याय चाहिए और डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. मुझे सिर्फ़ बहाने या औपचारिकताएं नहीं चाहिए. मैं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खास गुजारिश करता हूं कि तीन बार शिकायत करने के बावजूद मेरी बेटी को बचाया नहीं जा सका.”
मुकेश कुमार ने डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ औपचारिक जवाब नहीं, बल्कि मामले में जिम्मेदारी तय होते हुए देखना है। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से भी मामले में हस्तक्षेप की अपील की है।
2012 में पहली बार AIIMS पहुंची थी तन्वी
AIIMS के मुताबिक, तन्वी की पहली जांच 10 अक्टूबर 2012 को कार्डियोलॉजी OPD में हुई थी। जांच में उसे वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) और पल्मोनरी एट्रेसिया की समस्या का पता चला था।
VSD दिल में मौजूद एक छेद से जुड़ी जन्मजात स्थिति है, जबकि पल्मोनरी एट्रेसिया में दिल से फेफड़ों तक रक्त पहुंचने के रास्ते में गंभीर रुकावट होती है। ऐसी स्थिति में मरीज के इलाज के लिए उसकी हृदय संरचना और बीमारी की गंभीरता के आधार पर उपचार की रणनीति तय की जाती है।
2013 में हुईं कई महत्वपूर्ण जांच
AIIMS के अनुसार, साल 2013 में तन्वी के दिल और सर्जरी की संभावनाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इसके लिए CT एंजियोग्राफी, कन्वेंशनल एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन जैसी जांच की गईं।
इन जांचों का उद्देश्य तन्वी के दिल की संरचना, रक्त प्रवाह और सर्जरी की संभावनाओं का विस्तृत आकलन करना था।
2017 में सर्जरी से क्यों किया गया इनकार?
AIIMS ने बताया कि विस्तृत मेडिकल मूल्यांकन के बाद 2017 में तन्वी की हृदय संरचना और बीमारी की जटिलता को देखते हुए यह निष्कर्ष निकाला गया कि सर्जरी संभव नहीं थी।
अस्पताल के मुताबिक, उस समय परिवार को नियमित मेडिकल फॉलोअप और दवाओं के जरिए उपचार जारी रखने की सलाह दी गई थी। इसके बाद भी तन्वी AIIMS के संपर्क में रही और नियमित जांच कराती रही।
परिवार ने दूसरी राय भी ली
परिवार ने बाद में तन्वी की सर्जरी की संभावनाओं को लेकर अन्य विशेषज्ञों से भी सलाह ली। पिछले साल परिवार ने AIIMS के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के प्रमुख से राय ली थी। वहां भी दवा के जरिए इलाज जारी रखने की सलाह दी गई।
इसके बाद परिवार ने एक अन्य वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से भी राय ली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वहां से भी दवाओं के जरिए उपचार जारी रखने की सलाह दी गई थी।
24 अगस्त को दोबारा AIIMS में भर्ती हुई तन्वी
अगस्त 2026 में तन्वी की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे दोबारा AIIMS लाया गया। 24 अगस्त को उसे अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उसकी स्थिति और बीमारी की गंभीरता का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।
AIIMS के मुताबिक, इस दौरान हार्ट-लंग ट्रांसप्लांटेशन की संभावना पर भी विचार और मूल्यांकन किया गया। हालांकि, इलाज के दौरान 1 सितंबर की सुबह तन्वी की मौत हो गई।
AIIMS ने बनाई उच्चस्तरीय जांच कमेटी
मामला सामने आने के बाद AIIMS प्रशासन ने इसकी जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। अस्पताल का कहना है कि मरीज की सुरक्षा, पारदर्शिता, सबूतों पर आधारित चिकित्सकीय फैसलों और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
AIIMS ने कहा है कि पोस्टमार्टम और जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अब कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि तन्वी के इलाज के दौरान क्या-क्या चिकित्सकीय निर्णय लिए गए और उसकी मौत की परिस्थितियों में किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं।
13 साल के इंतजार ने खड़े किए कई सवाल
तन्वी की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर 2017 में मेडिकल जटिलताओं के कारण सर्जरी को संभव नहीं माना गया था, तो उसके बाद इलाज और वैकल्पिक विकल्पों की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी।
फिलहाल इस मामले में परिवार के आरोप और AIIMS की ओर से दी गई मेडिकल जानकारी दोनों सामने हैं। अंतिम तस्वीर उच्चस्तरीय कमेटी की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।