नई दिल्ली: अयोध्या के भव्य राम मंदिर की व्यवस्था अब एक ऐसे पूर्व सैन्य अधिकारी के हाथों में होगी, जिनका करीब चार दशक का करियर देश की सुरक्षा और सैन्य अभियानों से जुड़ा रहा है। भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला फुल-टाइम CEO नियुक्त किया गया है।
मिश्रा की नियुक्ति इसलिए भी खास है क्योंकि वह उस समय भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर रहे थे, जब मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था। इससे पहले वह कारगिल युद्ध के दौरान भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे हैं। करीब 38-39 साल के सैन्य करियर, 3,000 से ज्यादा घंटे की उड़ान और कई अहम पदों का अनुभव रखने वाले मिश्रा अब एक बिल्कुल अलग तरह की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले फुल-टाइम CEO बने
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 2 सितंबर 2026 को जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO नियुक्त किया। यह फैसला अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक के दौरान लिया गया।
CEO की जिम्मेदारी मंदिर की रोजमर्रा की प्रशासनिक और संचालन व्यवस्था को व्यवस्थित तरीके से संभालने की है। ट्रस्ट में यह पद पहली बार बनाया गया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब मंदिर की गतिविधियों का विस्तार हो रहा है और प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
मिश्रा की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में कुछ अन्य बदलाव भी किए गए हैं। स्वामी गोविंद देव गिरि को महासचिव और महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही नए ट्रस्टियों की नियुक्ति भी की गई है।
38 साल से ज्यादा वायुसेना में सेवा
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर करीब चार दशक लंबा रहा। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन लिया था। अपने लंबे करियर में वह फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट जैसे महत्वपूर्ण रोल में रहे।
उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी, एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से प्रशिक्षण और शिक्षा हासिल की। सैन्य सेवा के दौरान उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान का अनुभव रहा और उन्होंने कई तरह के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए। वह 30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से रिटायर हुए।
पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख रहे
जितेंद्र मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ यानी AOC-in-C का पद संभाला था। यह वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों में से एक है।
पश्चिमी वायु कमान देश के पश्चिमी हिस्से के संवेदनशील हवाई क्षेत्र और पाकिस्तान से लगी सीमा से जुड़े कई अहम इलाकों की सुरक्षा और ऑपरेशनल जिम्मेदारियां संभालती है।
इससे पहले मिश्रा इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (ऑपरेशंस) समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके थे। उन्होंने एक फाइटर स्क्वाड्रन की कमान भी संभाली और बेंगलुरु स्थित Aircraft & Systems Testing Establishment में चीफ टेस्ट पायलट की जिम्मेदारी निभाई।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान क्या थी भूमिका?
जितेंद्र मिश्रा के करियर का सबसे चर्चित अध्याय ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी।
उस समय मिश्रा पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। यानी पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल कमान उनके नेतृत्व में थी। ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया। वह उन चुनिंदा सैन्य अधिकारियों में शामिल रहे जिन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
यही वजह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद उनकी सैन्य पृष्ठभूमि सबसे ज्यादा चर्चा में है।
कारगिल युद्ध में भी रहा अहम योगदान
जितेंद्र मिश्रा का अनुभव सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर तक सीमित नहीं है। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भी वह ऐसे दल का हिस्सा थे, जिसने Mirage-2000 लड़ाकू विमानों के लिए लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
कारगिल संघर्ष के दौरान इन हथियारों का इस्तेमाल ऊंचाई वाले इलाकों में स्थित दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था। टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे इलाकों में हुई कार्रवाई में Mirage-2000 की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही थी।
कई बड़े सैन्य सम्मानों से हो चुके हैं सम्मानित
लंबे सैन्य करियर के दौरान जितेंद्र मिश्रा को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। ऑपरेशन सिंदूर में उनकी भूमिका के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक मिला। इसके अलावा उन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक और 2013 में विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।
इन सम्मानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारतीय वायुसेना में उन्होंने कितनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
अब सेना की कमान से मंदिर प्रशासन तक का सफर
करीब चार दशक तक देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा और सैन्य अभियानों से जुड़े रहने के बाद जितेंद्र मिश्रा की नई भूमिका काफी अलग है। अब उनके सामने चुनौती किसी सैन्य ऑपरेशन की कमान संभालने की नहीं, बल्कि दुनिया के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो चुके अयोध्या के राम मंदिर की विशाल प्रशासनिक व्यवस्था को संभालने की है।
राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा से जुड़े समन्वय, प्रशासनिक कामकाज, कर्मचारियों का प्रबंधन, सुविधाओं का विस्तार और ट्रस्ट की विभिन्न गतिविधियों को व्यवस्थित रखना CEO की भूमिका का अहम हिस्सा होगा।
सैन्य अनुशासन का अनुभव आएगा काम?
जितेंद्र मिश्रा की सबसे बड़ी ताकत उनका लंबा प्रशासनिक और ऑपरेशनल अनुभव माना जा रहा है। वायुसेना में उन्होंने अलग-अलग स्तर पर टीमों का नेतृत्व किया है और बेहद संवेदनशील परिस्थितियों में निर्णय लेने की जिम्मेदारी निभाई है।
अब यही अनुभव राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन में कितना प्रभावी साबित होता है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी। लेकिन इतना जरूर है कि फाइटर पायलट से एयर मार्शल और ऑपरेशन सिंदूर के कमांडर तक का सफर तय करने वाले जितेंद्र मिश्रा के करियर में राम मंदिर के CEO की जिम्मेदारी एक बिल्कुल नया अध्याय है।