भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर में यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल लगातार तेजी से बढ़ रहा है। देश में छोटे से लेकर बड़े लेन-देन के लिए अब यूपीआई सबसे बड़ा जरिया बन चुका है। हालांकि, इस बढ़ते बाजार में दो विदेशी कंपनियों का दबदबा सबसे ज्यादा बना हुआ है।
आंकड़ों के मुताबिक, देश के कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का लगभग 80 फीसदी हिस्सा अकेले इन दो विदेशी कंपनियों के पास है। इसके मुकाबले घरेलू ऐप्स और बैंक इस सेगमेंट में काफी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर इंटरफेस आसान होने और शुरुआती दौर में बड़े पैमाने पर कैशबैक व ऑफर्स मिलने की वजह से इन विदेशी कंपनियों ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। हालांकि, सरकार और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) लगातार यह कोशिश कर रहे हैं कि बाजार में किसी एक या दो कंपनियों का एकाधिकार न रहे, ताकि घरेलू ऐप्स को भी आगे बढ़ने का पूरा मौका मिल सके।