पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल को चार साल पूरे होने वाले हैं। सत्ता में आने से पहले पार्टी ने राज्य से महज तीन महीने में पूरी तरह नशा खत्म करने का बड़ा वादा किया था। चार साल बीत जाने के बाद इस मोर्चे पर सरकार के काम और उसके परिणामों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
नशे की समस्या पंजाब के सबसे बड़े मुद्दों में शामिल रही है। चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने इस पर कड़े कदम उठाने का भरोसा दिया था। भगवंत मान सरकार ने कार्यभार संभालते ही कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू की थी, जिसमें तस्करों पर शिकंजा कसना और नशा मुक्ति केंद्रों का संचालन शामिल था।
हालांकि, इन चार सालों में विपक्ष लगातार यह सवाल उठाता रहा है कि राज्य से नशे का कारोबार पूरी तरह समाप्त क्यों नहीं हो सका है। दूसरी ओर, सरकार का पक्ष है कि पुलिस ने बड़े स्तर पर नशा तस्करों की संपत्तियां जब्त की हैं और सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
जमीनी स्तर पर स्थिति की बात करें तो ग्रामीण और शहरी इलाकों में युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालने के लिए काउंसलिंग और इलाज की सुविधाओं को बढ़ाने का दावा किया गया है। इसके बावजूद, आम जनता और पीड़ित परिवारों का मानना है कि इस गंभीर समस्या से पूरी तरह निजात पाने के लिए अभी और ठोस और कड़े प्रयासों की जरूरत है।