UPI पर नए चार्ज को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे UPI पर टैक्स बताया और इसे वापस लेने की मांग की है। इसी बीच सरकार की ओर से वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति की उस रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है, जिसमें UPI के लिए आय का एक स्थायी मॉडल बनाने की सिफारिश की गई थी।
इस रिपोर्ट को मंजूरी देने वाली समिति की बैठक में कांग्रेस के पांच सांसद भी मौजूद थे। इनमें पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट को मंजूरी दिए जाने के दौरान इन सांसदों की ओर से कोई असहमति दर्ज नहीं हुई थी।
हालांकि, समिति की सिफारिश और केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए किसी खास चार्ज को एक ही मानना सही नहीं होगा। यही वजह है कि इस पूरे मामले में समिति की सिफारिश और मौजूदा चार्ज व्यवस्था के बीच अंतर समझना जरूरी है।
कौन हैं कांग्रेस के पांच सांसद?
वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब हैं। 12 अगस्त को हुई समिति की बैठक में कांग्रेस की ओर से पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ मौजूद थे।
सरकार से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, समिति की प्रकाशित कार्यवाही में इन सांसदों की कोई असहमति दर्ज नहीं है। सरकार अब राहुल गांधी के UPI विरोध के जवाब में इसी तथ्य का हवाला दे रही है।
समिति ने UPI को लेकर क्या सिफारिश की थी?
समिति की रिपोर्ट में UPI के लिए ऐसी आय व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई गई थी, जिससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम लंबे समय तक सरकारी सहायता पर निर्भर न रहे।
रिपोर्ट में UPI से जुड़ी लागत का भी जिक्र किया गया था। सरकार ने 2026-27 में शून्य-चार्ज व्यवस्था से जुड़ी लागत की भरपाई के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। समिति के मुताबिक UPI के संचालन, सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और तकनीकी ढांचे पर लगातार खर्च होता है। ऐसे में इसकी आर्थिक स्थिरता के लिए आय का कोई मॉडल तैयार करने की जरूरत है।
राहुल गांधी किस बात का विरोध कर रहे हैं?
राहुल गांधी ने बुधवार को एक वीडियो जारी कर नए UPI चार्ज सिस्टम पर सवाल उठाया। उन्होंने इसे UPI पर टैक्स बताते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के फैसले से अमेरिका को फायदा होगा।
वित्त मंत्रालय ने इस आरोप को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि UPI से जुड़े फैसले किसी विदेशी दबाव में नहीं लिए गए हैं और ये देश की घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखकर किए गए हैं।
सरकार के मुताबिक, नया 0.4 प्रतिशत व्यापारी चार्ज ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा। यह 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ चुनिंदा कारोबारी UPI लेन-देन पर व्यापारियों से लिया जाएगा। 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले लेन-देन पर यह चार्ज लागू नहीं होगा। सरकार का दावा है कि करीब 96 प्रतिशत व्यापारी UPI लेन-देन भी इस चार्ज से प्रभावित नहीं होंगे।
समिति की सिफारिश और लागू चार्ज में अंतर
इस पूरे विवाद में सबसे अहम बात यही है कि संसदीय समिति ने UPI के लिए आय का एक टिकाऊ मॉडल बनाने की सिफारिश की थी, जबकि केंद्र सरकार ने अब कुछ चुनिंदा कारोबारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत चार्ज की व्यवस्था घोषित की है।
इसलिए समिति की सिफारिश को सीधे मौजूदा चार्ज व्यवस्था के बराबर मानना सही नहीं होगा। इसी तरह केवल समिति की बैठक में किसी सांसद की मौजूदगी या प्रकाशित कार्यवाही में असहमति दर्ज नहीं होने से यह निष्कर्ष भी नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित सांसद ने मौजूदा 0.4 प्रतिशत चार्ज का व्यक्तिगत रूप से समर्थन किया था।
नितिन कामथ ने भी उठाया सवाल
जिरोधा के संस्थापक नितिन कामथ ने भी UPI चार्ज व्यवस्था के व्यावहारिक पहलू पर सवाल उठाया है। उन्होंने सामान्य कारोबारी भुगतान और शेयर ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे जमा करने के बीच अंतर समझाया।
कामथ के मुताबिक, अगर कोई ग्राहक 20 हजार रुपये का सामान खरीदता है तो व्यापारी को उस बिक्री से कमाई होती है। लेकिन अगर कोई व्यक्ति 2 लाख रुपये अपने शेयर ट्रेडिंग अकाउंट में UPI के जरिए जमा करता है और उसी दिन कोई शेयर नहीं खरीदता, तो बिचौलिये को उस भुगतान से तत्काल कारोबार नहीं मिलता। ऐसे मामलों में चार्ज का बोझ किस तरह तय होगा, यही उनका सवाल है।
अब सियासी बहस किस बात पर?
UPI विवाद में फिलहाल दो अलग-अलग मुद्दे सामने हैं। एक तरफ राहुल गांधी और विपक्ष मौजूदा चार्ज व्यवस्था के असर पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार संसदीय समिति की उस रिपोर्ट का हवाला दे रही है, जिसमें UPI के लिए स्थायी आय व्यवस्था की जरूरत बताई गई थी।
कांग्रेस के पांच सांसदों की समिति में मौजूदगी और रिपोर्ट के समय उनकी असहमति दर्ज नहीं होने को सरकार राजनीतिक बहस में उठा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे मौजूदा 0.4 प्रतिशत चार्ज के उनके व्यक्तिगत समर्थन के रूप में देखना अलग निष्कर्ष होगा।