नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों और अदालत के निर्देशों के कथित उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाया। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कैंपस और उसके आसपास नियमों के उल्लंघन और आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति को हर हाल में नियंत्रित करना होगा।
140 उम्मीदवारों को जारी होगा नोटिस
हाई कोर्ट ने DUSU के चार प्रमुख पदों के लिए चुनाव लड़ रहे सभी 140 उम्मीदवारों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्रमुख छात्र संगठनों को भी नोटिस देने को कहा है। उनसे पूछा जाएगा कि चुनाव के दौरान कथित नियमों के उल्लंघन के लिए उनके खिलाफ exemplary electoral damages यानी चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए।
कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील को कथित उल्लंघनों से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज जुटाकर दो सप्ताह के भीतर दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को अपना जवाब देने का मौका मिलेगा।
पुलिस को कार्रवाई पूरी करने का निर्देश
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि चुनाव से जुड़े मामलों में FIR दर्ज की गई हैं, वाहनों को जब्त किया गया है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को केवल कागजों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे उसके तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस छात्रों के नाम पर कार्रवाई करने से पीछे न हटे।
जीत के जुलूस पर पूरी रोक
DUSU चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद किसी भी तरह के विजय जुलूस पर रोक लगा दी गई है। यह रोक दिल्ली की सड़कों के साथ-साथ विश्वविद्यालय के कॉलेज कैंपस और हॉस्टलों में भी लागू होगी।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी है कि कोई विजय जुलूस न निकले। आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित छात्रों, उम्मीदवारों और समर्थकों के खिलाफ आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा इसे अदालत की अवमानना भी माना जा सकता है।
हथियार और महंगी गाड़ियों को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने चुनाव प्रचार के दौरान हथियार लहराने और महंगी गाड़ियों के काफिले को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि हथियार लेकर घूमने वाले या ऐसे काफिलों में शामिल लोगों को किस तरह छात्र माना जाए। कोर्ट ने बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों के इस्तेमाल पर भी पुलिस से सवाल किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने कोर्ट को चुनाव से जुड़े उल्लंघनों पर की गई कार्रवाई की जानकारी दी, जिसमें बड़ी संख्या में चालान, वाहनों की जब्ती, FIR और गिरफ्तारियां शामिल हैं।