जिनेवा: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के मंच पर पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ अजाकिया ने अपने ही देश की सरकार और सेना पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पाकिस्तान में सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की स्थिति का मुद्दा उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर जवाबदेही तय करने की अपील की।
अजाकिया के भाषण के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल ने आपत्ति भी जताई। उनके मुताबिक, पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने उन पर UNHRC के मंच का इस्तेमाल पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए करने का आरोप लगाया। इसके बाद परिषद के चेयर ने सामान्य बहस जारी रहने की बात कहते हुए अजाकिया को अपना वक्तव्य पूरा करने की अनुमति दी।
पाकिस्तान में सेना के प्रभाव का लगाया आरोप
अजाकिया ने अपने वक्तव्य में पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और सेना की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में राजनीतिक संस्थाओं और संसाधनों पर सैन्य नेतृत्व का प्रभाव बढ़ रहा है।
उन्होंने सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के साथ-साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब किए जाने, हिरासत, यातना और अन्य तरह के उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। ये आरोप अजाकिया ने अपने भाषण में लगाए हैं और उनके वक्तव्य में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि प्रस्तुत नहीं की गई।
पानी के बंटवारे को लेकर भी पाकिस्तान पर निशाना
अजाकिया ने पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंधु नदी प्रणाली के पानी का बड़ा हिस्सा पंजाब में सिंचाई के लिए इस्तेमाल होता है और सिंध तक पहुंचते-पहुंचते पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है।
उन्होंने बाढ़ की स्थिति का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि ज्यादा बारिश के दौरान पंजाब की ओर से पानी छोड़े जाने का असर सिंध के निचले इलाकों पर पड़ता है। उनके मुताबिक, पाकिस्तान को भारत पर पानी रोकने का आरोप लगाने के बजाय अपने राज्यों के बीच पानी के बंटवारे की स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।
कौन हैं आरिफ अजाकिया?
आरिफ अजाकिया पाकिस्तान में जन्मे मानवाधिकार कार्यकर्ता और पूर्व स्थानीय राजनेता हैं। हालांकि, उन्हें कराची का पूर्व मेयर बताना सही नहीं है। उपलब्ध फैक्ट-चेक के अनुसार, वह कराची के जमशेद टाउन के काउंसलर/नाज़िम रह चुके हैं। बाद में वह लंदन में रहने लगे और सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान में मानवाधिकार और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं।
पुराने रिकॉर्ड में भी जमशेद टाउन के नाज़िम के तौर पर मुहम्मद आरिफ अजाकिया का उल्लेख मिलता है।
भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर भी रखी राय
अजाकिया ने अपने वक्तव्य में पाकिस्तान के भारत के साथ संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान आर्थिक और सामाजिक विकास चाहता है तो उसे भारत के साथ अपने रिश्ते सुधारने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भी पाकिस्तान की नीतियों की आलोचना की और कहा कि भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए पाकिस्तान को अपनी जमीन से संचालित होने वाले आतंकवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
UN में पाकिस्तान ने जताई आपत्ति
अजाकिया के भाषण के दौरान पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल की आपत्ति के बाद कुछ समय के लिए बहस में व्यवधान आया। पाकिस्तानी पक्ष ने उनके आरोपों को खारिज किया और कहा कि UNHRC के मंच का इस्तेमाल पाकिस्तान को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
इसके बाद परिषद के अध्यक्ष ने सामान्य बहस जारी रहने की बात कहते हुए अजाकिया को दोबारा बोलने की अनुमति दी। अजाकिया ने अपने आरोपों को कथित दस्तावेजी जानकारी पर आधारित बताया और संयुक्त राष्ट्र से पाकिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पर जवाबदेही तय करने की मांग की।
UNHRC का 63वां सत्र 7 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक जिनेवा के पैलेस ऑफ नेशंस में चल रहा है। अजाकिया का वक्तव्य 17 सितंबर को हुई सामान्य बहस के दौरान आया।