भारत में चावल उत्पादन 10 साल के निचले स्तर पर, बाजारों पर पड़ेगा असर

भारत में चावल का उत्पादन पिछले 10 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसका असर आने वाले समय में बाजारों और कीमतों पर पड़ सकता है।

इस साल देश में मानसून के आखिरी दौर में सामान्य से कम बारिश का असर धान की फसल पर साफ दिखाई देने लगा है। कम बारिश और कुछ प्रमुख राज्यों में धान की खेती का रकबा घटने से भारत के चावल उत्पादन में बड़ी गिरावट का अनुमान है। उद्योग से जुड़े जानकारों के मुताबिक, 2026 में चावल का उत्पादन करीब 6.5 फीसदी तक घट सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह करीब दो दशकों में सबसे बड़ी गिरावट होगी और पिछले 10 साल में पहली बार देश के चावल उत्पादन में कमी दर्ज होगी।

दक्षिण और पूर्वी भारत के कई धान उत्पादक इलाकों में बारिश की कमी का असर फसल की पैदावार पर पड़ा है। इसका असर आने वाले समय में स्थानीय बाजारों में चावल की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, सरकार के पास चावल और धान का बड़ा भंडार मौजूद है, जिससे घरेलू बाजार में अचानक बड़ी कमी की स्थिति बनने की आशंका कम है।

करीब 6.5 फीसदी घट सकता है उत्पादन

Rice Exporters Association के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव के मुताबिक, इस साल उत्पादन में करीब 100 लाख मीट्रिक टन की कमी आ सकती है। पिछले साल भारत में रिकॉर्ड करीब 15.4 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था, जबकि इस साल यह घटकर करीब 14.4 करोड़ टन रह सकता है। यह गिरावट 2009-10 के बाद सबसे बड़ी हो सकती है।

बारिश की कमी और कम हुई धान की बुआई

इस मानसून सीजन में 1 जून से अब तक देश में सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। कुछ प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में बारिश की कमी 42 फीसदी तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर धान की खेती के रकबे पर भी पड़ा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 11 सितंबर तक गर्मी में बोई जाने वाली धान की फसल का क्षेत्रफल करीब 4.268 करोड़ हेक्टेयर था, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 4 फीसदी कम है। यही फसल देश के कुल चावल उत्पादन में 80 फीसदी से ज्यादा योगदान देती है।

कम बारिश की वजह से जलाशयों में पानी का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में आने वाले रबी सीजन में धान की बुआई का रकबा भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

मंडियों में बढ़ने लगी चावल की कीमत

उत्पादन में कमी की आशंका का असर बाजार पर अभी से दिखाई देने लगा है। स्थानीय मंडियों में चावल की कीमतें बढ़ रही हैं और भारत से निर्यात होने वाले चावल की कीमतें भी एक साल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। दूसरी ओर, थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रमुख चावल निर्यातक देशों में भी कीमतें बढ़ी हुई हैं।

इस स्थिति में अगर घरेलू कीमतें आगे बढ़ती हैं तो आम उपभोक्ताओं पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल सरकार के पास मौजूद बड़ा स्टॉक इस दबाव को कम करने में मदद कर सकता है।

सरकारी गोदामों में 5.96 करोड़ टन का स्टॉक

भारत के लिए सबसे बड़ी राहत सरकारी गोदामों में मौजूद चावल और धान का बड़ा भंडार है। 1 सितंबर 2026 तक राज्य के भंडार में करीब 5.96 करोड़ टन चावल और बिना कुटा धान मौजूद था। यह 1 अक्टूबर के लिए सरकार के तय 1.03 करोड़ टन के लक्ष्य से कई गुना ज्यादा है।

यही बड़ा स्टॉक घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने और निर्यात जारी रखने में मदद कर सकता है। ऐसे में उत्पादन घटने के बावजूद भारत के पास चावल की उपलब्धता को संभालने के लिए पर्याप्त बफर मौजूद है।

आम लोगों पर कितना पड़ेगा असर?

चावल के उत्पादन में कमी से कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन सरकारी भंडार मजबूत होने के कारण घरेलू बाजार में तत्काल बड़ी कमी की संभावना कम दिखाई देती है। आने वाले महीनों में बारिश, रबी सीजन में बुआई और सरकारी स्टॉक से जुड़ी नीतियां यह तय करेंगी कि चावल की कीमतों पर कितना असर पड़ता है।

कुल मिलाकर, इस साल चावल उत्पादन में गिरावट एक बड़ी चिंता जरूर है, लेकिन मजबूत सरकारी स्टॉक फिलहाल देश के लिए राहत की स्थिति बनाए हुए है।

संबंधित खबरें

iGOT कर्मयोगी पोर्टल क्या है और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह क्यों है बेहद फायदेमंद?

गार्गी कॉलेज में DUSU अध्यक्ष के खिलाफ हंगामा, छात्राओं ने किया विरोध

भगवद गीता का वह प्रमुख श्लोक, जो जीवन में देता है मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति

एशियन गेम्स में खिलाड़ियों को उठानी पड़ी परेशानी, कमरे के लिए करना पड़ा घंटों इंतजार

DUSU ELECTION RESULT 2026: ABVP ने जीती 3 सीटें, यश डबास बने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत

Recommended Stories

iGOT कर्मयोगी पोर्टल क्या है और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह क्यों है बेहद फायदेमंद?

गार्गी कॉलेज में DUSU अध्यक्ष के खिलाफ हंगामा, छात्राओं ने किया विरोध

भगवद गीता का वह प्रमुख श्लोक, जो जीवन में देता है मानसिक शांति और तनाव से मुक्ति

एशियन गेम्स में खिलाड़ियों को उठानी पड़ी परेशानी, कमरे के लिए करना पड़ा घंटों इंतजार

DUSU ELECTION RESULT 2026: ABVP ने जीती 3 सीटें, यश डबास बने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन की जीत