भाग्यश्री के परिवार में उत्तराधिकारी की जंग: क्या है पटवर्धन राजघराने के विवाद की पूरी कहानी

बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री के पटवर्धन राजघराने के परिवार में उत्तराधिकारी को लेकर विवाद चल रहा है। आइए जानते हैं इस शाही परिवार के विवाद की पूरी कहानी।

बॉलीवुड अभिनेत्री भाग्यश्री इन दिनों अपने परिवार को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र के सांगली के पूर्व राजघराने से जुड़े पटवर्धन परिवार में विरासत और पारंपरिक अधिकारों को लेकर विवाद सामने आया है। विवाद उस समय सुर्खियों में आया, जब गणेश चतुर्थी के दौरान भाग्यश्री ने सांगली के ऐतिहासिक गणपति पंचायतन मंदिर में आरती की। इसके बाद उनके पिता विजयसिंहराजे पटवर्धन ने परिवार के उत्तराधिकारी को लेकर अपना रुख साफ किया।

मंदिर में आरती के बाद क्यों बढ़ा विवाद?

भाग्यश्री करीब चार साल बाद गणेश चतुर्थी के मौके पर सांगली पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि उनके पिता की तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए वह परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए मंदिर आई थीं। उन्होंने गणपति की पूजा और आरती में हिस्सा लिया।भाग्यश्री के पिता विजयसिंहराजे पटवर्धन ने उनकी गैरमौजूदगी में आरती किए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि मंदिर में पारंपरिक पूजा का अधिकार उनके और उनकी पत्नी राजलक्ष्मीराजे पटवर्धन का है और परिवार की परंपराओं में बदलाव नहीं होना चाहिए। मंदिर परिसर में भाग्यश्री और ट्रस्ट मैनेजर जयदीप अभ्यंकर के बीच बहस की बात भी सामने आई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा।

कौन है पटवर्धन परिवार का उत्तराधिकारी?

विरासत विवाद की सबसे बड़ी वजह परिवार के उत्तराधिकारी को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक, विजयसिंहराजे पटवर्धन ने जनवरी 2024 में आदित्यराजे पटवर्धन को गोद लिया और उन्हें सांगली परिवार का उत्तराधिकारी घोषित किया। आदित्यराजे उनके जैविक बेटे नहीं हैं।

विजयसिंहराजे का कहना है कि आदित्यराजे ही परिवार के एकमात्र उत्तराधिकारी हैं और वही आगे परिवार की परंपरा और विरासत को संभालेंगे। उनकी पत्नी राजलक्ष्मीराजे ने भी गोद लेने की वजह परिवार में बेटे का न होना बताई है।

भाग्यश्री की भूमिका को लेकर क्या है विवाद?

भाग्यश्री परिवार की तीन बेटियों में सबसे बड़ी हैं। उनका कहना है कि परिवार की परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए बेटियों की भी भूमिका होनी चाहिए। गणेश चतुर्थी पर मंदिर में उनकी मौजूदगी को इसी संदर्भ में देखा गया। दूसरी ओर, परिवार के मुखिया का कहना है कि पारंपरिक धार्मिक जिम्मेदारियां तय व्यवस्था के अनुसार ही निभाई जानी चाहिए।

हालांकि, परिवार की परंपरा में उत्तराधिकारी होने और किसी संपत्ति पर कानूनी मालिकाना हक एक ही बात नहीं है। किसी गोद लिए बच्चे के उत्तराधिकारी होने का सवाल और परिवार की अलग-अलग संपत्तियों में कानूनी हिस्सेदारी का सवाल अलग-अलग कानूनी मुद्दे हो सकते हैं। यह संपत्ति के प्रकार, वैध वसीयत और अन्य कानूनी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

क्या है पटवर्धन राजघराने का इतिहास?

पटवर्धन परिवार का इतिहास मराठा पेशवाओं के दौर से जुड़ा हुआ है। परिवार के पूर्वज मराठा पेशवाओं के सेनापति रहे थे और आजादी से पहले पटवर्धन परिवार सांगली रियासत पर शासन करता था। भारतीय संघ में रियासतों के विलय के बाद राजघराने की राजनीतिक सत्ता समाप्त हो गई, लेकिन परिवार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान आज भी बनी हुई है।

फिलहाल विवाद का केंद्र सांगली के गणपति पंचायतन मंदिर की परंपराएं और परिवार में उत्तराधिकार की भूमिका है। भाग्यश्री की मंदिर में आरती के बाद सामने आए मतभेद ने पटवर्धन परिवार की विरासत और परंपराओं से जुड़े पुराने सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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