UAE के दखल से क्यों परेशान हैं अफ्रीकी देश? इरिट्रिया से अल्जीरिया तक सुलग रहा विवाद

अफ्रीकी महाद्वीप में यूएई की बढ़ती दखलअंदाजी से कई देश परेशान हैं। इरिट्रिया से लेकर अल्जीरिया तक इसको लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

अफ्रीका और लाल सागर क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। बंदरगाहों में निवेश से लेकर सुरक्षा सहयोग और क्षेत्रीय संघर्षों में कथित भूमिका तक, UAE की गतिविधियों को लेकर कई अफ्रीकी देशों में सवाल उठते रहे हैं। इस तनाव का ताजा उदाहरण 10 सितंबर 2026 को सामने आया, जब अल्जीरिया ने UAE के साथ राजनयिक संबंध तोड़ने का ऐलान किया। अल्जीरियाई विदेश मंत्रालय ने UAE पर “उकसावे वाली और शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों” का आरोप लगाया और कहा कि द्विपक्षीय संबंध बचाने के सभी प्रयास खत्म हो चुके हैं। UAE के राजदूत को 48 घंटे में देश छोड़ने के लिए कहा गया।

अल्जीरिया ने किसी एक घटना को संबंध टूटने की वजह नहीं बताया। दोनों देशों के बीच पश्चिमी सहारा, इजरायल, उत्तरी अफ्रीका और साहेल क्षेत्र में प्रभाव को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

अफ्रीका में UAE के बढ़ते प्रभाव पर क्यों उठ रहे सवाल?

UAE ने अफ्रीका में निवेश, बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा सहयोग के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत की है। DP World और AD Ports Group जैसी UAE कंपनियों की कई देशों में महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं।

सोमालिया और उसके अलग-अलग क्षेत्रों में UAE का आर्थिक और सुरक्षा प्रभाव लंबे समय से चर्चा में रहा है। जनवरी 2026 में सोमालिया की सरकार ने UAE के साथ बंदरगाह, सुरक्षा और रक्षा से जुड़े सभी समझौते रद्द कर दिए थे। मोगादिशु ने UAE पर देश की संप्रभुता, राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक स्वतंत्रता को कमजोर करने वाली गतिविधियों का आरोप लगाया था। UAE की ओर से इन आरोपों पर अलग रुख सामने आया है।

सोमालिया में यह विवाद उस समय और बढ़ा जब इजरायल ने दिसंबर 2025 में सोमालीलैंड को मान्यता दी। सोमालिया सोमालीलैंड को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। विश्लेषकों के मुताबिक, UAE के सोमालीलैंड के बेरबेरा बंदरगाह में निवेश और क्षेत्रीय प्रभाव ने भी इस विवाद को संवेदनशील बनाया है।

सूडान में RSF को समर्थन का आरोप

UAE की भूमिका को लेकर सबसे गंभीर विवाद सूडान के गृहयुद्ध से जुड़ा है। अप्रैल 2023 से सूडानी सेना और अर्धसैनिक संगठन रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच संघर्ष जारी है। सूडान की सेना और अन्य पक्ष UAE पर RSF को हथियार, धन और लॉजिस्टिक मदद देने का आरोप लगाते रहे हैं। 2026 में ह्यूमन राइट्स वॉच ने भी ऐसी रिपोर्ट जारी की, जिसमें UAE से जुड़े एक सुरक्षा नेटवर्क के जरिए कोलंबियाई पूर्व सैनिकों की RSF के समर्थन में तैनाती के सबूत मिलने का दावा किया गया। UAE ने RSF को सैन्य समर्थन देने के आरोपों को खारिज किया है।

संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट में भी विदेशी सैन्य सहायता और हथियारों को सूडान के युद्ध को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल बताया गया है। रिपोर्ट में UAE से जुड़े नेटवर्क का भी उल्लेख हुआ है, हालांकि UAE इन आरोपों को नकारता है।

6 अरब डॉलर का बंदरगाह समझौता भी टूटा

सूडान और UAE के बीच दिसंबर 2022 में अबू अमामा बंदरगाह और आर्थिक क्षेत्र के विकास के लिए करीब 6 अरब डॉलर का समझौता हुआ था। परियोजना में बंदरगाह, आर्थिक क्षेत्र, एयरपोर्ट और कृषि क्षेत्र का विकास शामिल था।

लेकिन नवंबर 2024 में सूडान सरकार ने इस समझौते को रद्द कर दिया। सूडान के वित्त मंत्री ने UAE पर RSF को समर्थन देने के आरोप लगाते हुए यह फैसला लिया था। UAE ने RSF को समर्थन देने से इनकार किया है।

इरिट्रिया और UAE के रिश्तों में भी बढ़ी दूरी

लाल सागर क्षेत्र में इरिट्रिया भी UAE की भूमिका को लेकर सतर्क रहा है। यमन युद्ध के दौरान UAE ने इरिट्रिया के असाब में सैन्य ढांचा विकसित किया था। बाद में दोनों देशों के रिश्तों में दूरी बढ़ी। एक हालिया इंटरव्यू में इरिट्रिया के विदेश मंत्री ओस्मान सालेह ने अफ्रीका में UAE की बंदरगाह नीति पर सवाल उठाते हुए इसे “पोर्ट इम्पीरियलिज्म” से जोड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, 2016 के आसपास इरिट्रिया ने दहलक द्वीप समूह में UAE और इजरायल की संभावित संयुक्त सैन्य सुविधा के प्रस्ताव को भी स्वीकार नहीं किया था।

इरिट्रिया की चिंता केवल बंदरगाहों तक सीमित नहीं है। UAE, इजरायल और इथियोपिया के बीच बढ़ते संबंधों को लेकर भी अस्मारा सतर्क रहा है। इथियोपिया की लाल सागर तक पहुंच की इच्छा और सोमालीलैंड में UAE के प्रभाव को इरिट्रिया अपनी सुरक्षा के नजरिए से देखता है।

लीबिया में हफ्तार के समर्थन का आरोप

लीबिया भी UAE और उसके क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के बीच प्रभाव की लड़ाई का एक प्रमुख केंद्र रहा है। UAE पर पूर्वी लीबिया के सैन्य कमांडर खलीफा हफ्तार के समर्थन का आरोप लगाया जाता रहा है।

मानवाधिकार संगठनों और शोध संस्थानों ने लीबिया में UAE की ओर से स्थानीय सशस्त्र समूहों को समर्थन दिए जाने के आरोपों का दस्तावेजीकरण किया है। हफ्तार के समर्थन को लेकर UAE की नीति को लेकर तुर्की और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ भी मतभेद रहे हैं।

यमन में STC को समर्थन पर विवाद

यमन में UAE की भूमिका भी लंबे समय से विवाद का विषय रही है। UAE ने वहां सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) सहित दक्षिणी यमन के कई स्थानीय सुरक्षा और राजनीतिक समूहों के साथ संबंध बनाए हैं। STC दक्षिणी यमन के लिए अलग राजनीतिक व्यवस्था और स्वतंत्रता की मांग करता है। इस संगठन को लेकर UAE और सऊदी अरब के हितों में कई बार मतभेद सामने आए हैं।

जिबूती से भी बिगड़े UAE के रिश्ते

लाल सागर के प्रवेश द्वार बाब-अल-मंदेब के पास स्थित जिबूती में भी UAE की बंदरगाह नीति को लेकर विवाद हुआ था।

UAE की कंपनी DP World और जिबूती के बीच डोरालेह कंटेनर टर्मिनल से जुड़ा समझौता हुआ था। बाद में दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ा और 2018 में जिबूती ने DP World की लंबी अवधि की रियायत समाप्त कर दी। इससे UAE और जिबूती के संबंधों में बड़ा तनाव पैदा हुआ।

बंदरगाहों से लेकर सुरक्षा तक UAE की रणनीति

अफ्रीका में UAE का प्रभाव केवल सैन्य गतिविधियों तक सीमित नहीं है। बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, कृषि, खनन और निवेश इसके बड़े हिस्से हैं। सोमालीलैंड के बेरबेरा, तंजानिया के दार-एस-सलाम और अन्य रणनीतिक स्थानों पर UAE से जुड़ी कंपनियों की परियोजनाएं हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन आर्थिक परियोजनाओं का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि कई बंदरगाह रणनीतिक समुद्री मार्गों के पास स्थित हैं।

विशेष रूप से लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के आसपास बंदरगाहों में निवेश UAE को व्यापारिक रास्तों के साथ-साथ क्षेत्रीय रणनीतिक प्रभाव भी देता है।

अल्जीरिया क्यों हुआ UAE से नाराज?

अल्जीरिया और UAE के रिश्ते पहले अपेक्षाकृत सामान्य थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बढ़े। इनमें पश्चिमी सहारा, इजरायल के साथ UAE के संबंध और साहेल क्षेत्र में प्रभाव प्रमुख हैं। अल्जीरियाई राष्ट्रपति अब्देलमजीद तेब्बौने ने हाल के महीनों में एक खाड़ी देश पर लीबिया, माली और सूडान जैसे देशों में अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया था। हालांकि उन्होंने हमेशा UAE का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयानों को व्यापक रूप से UAE की ओर संकेत के तौर पर देखा गया। UAE ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है।

BRICS को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद की चर्चा हुई है, लेकिन उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि अल्जीरिया की BRICS सदस्यता UAE के विरोध के कारण ही रुकी थी। 2023 में अल्जीरिया की सदस्यता स्वीकार नहीं हुई थी और 2024 में अल्जीरियाई स्रोतों ने बताया कि देश ने सदस्यता की कोशिश से पीछे हटने का फैसला किया।

अफ्रीका में बदलता शक्ति संतुलन

अल्जीरिया का UAE से संबंध तोड़ना केवल दो देशों के बीच कूटनीतिक विवाद नहीं है। इसके पीछे उत्तरी अफ्रीका, साहेल और लाल सागर में बदलता शक्ति संतुलन भी दिखाई देता है। एक तरफ UAE बंदरगाहों, निवेश और सुरक्षा साझेदारियों के जरिए अफ्रीका में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। दूसरी तरफ अल्जीरिया, सूडान और सोमालिया जैसे देशों की सरकारों ने अलग-अलग मौकों पर UAE की गतिविधियों को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं।

हालांकि इन देशों के आरोपों और UAE के इनकार के बीच कई मामलों में तथ्य और दावे अभी विवादित हैं। ऐसे में UAE की अफ्रीका नीति को केवल सैन्य विस्तार के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। इसमें व्यापार, बंदरगाह, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय कूटनीति सभी शामिल हैं।

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